अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनाव को लेकर हाईकोर्ट ने जारी किए अहम निर्देश।
शिमला,ब्यूरो रिपोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने नगर निगमों और नगर निकाय में अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के चुनावों को लेकर अंतरिम आदेश जारी किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पदेन सदस्य यानी विधानसभा सदस्य स्थानीय निकायों के शीर्ष पदों के चुनाव में मतदान नहीं कर सकते हैं। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने राज्य सरकार और चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि वे हिमाचल प्रदेश के नगर निकायों में अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के चुनावों की प्रक्रिया को बिना किसी रुकावट के पूरा करें।
यह चुनाव केवल निर्वाचित सदस्यों की इच्छा और बहुमत के आधार पर ही संपन्न कराया जाएगा। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने नगर निगमों और नगर निकाय में अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के चुनावों को लेकर अंतरिम आदेश जारी किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पदेन सदस्य यानी विधानसभा सदस्य स्थानीय निकायों के शीर्ष पदों के चुनाव में मतदान नहीं कर सकते हैं। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने राज्य सरकार और चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि वे हिमाचल प्रदेश के नगर निकायों में अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के चुनावों की प्रक्रिया को बिना किसी रुकावट के पूरा करें।
यह चुनाव केवल निर्वाचित सदस्यों की इच्छा और बहुमत के आधार पर ही संपन्न कराया जाएगा। अधिनियम की धारा 28, 30, 31 व 32 के तहत होने वाली सामान्य बैठकों, समितियों की बैठकों में विधायक भाग ले सकते हैं। अदालत ने कहा कि नगर निकाय स्थानीय स्वशासन की संस्थाएं हैं। यदि विधायकों को अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव में वोट डालने की अनुमति दी जाती है, तो यह स्थानीय निकायों की स्वायत्तता में हस्तक्षेप होगा। स्थानीय स्तर पर जनता की ओर से दिए गए जनादेश का उल्लंघन होगा। हाईकोर्ट में वंदना कुमारी, संजय चौहान और नंदिनी सूद और अन्य की ओर से राज्य चुनाव आयोग के खिलाफ याचिकाएं दायर की गई थीं। सरकार ने तर्क दिया कि विधायकों को वोट देने का पूर्ण अधिकार है। कोर्ट ने इन तर्कों को खारिज कर दिया।

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