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सोलरयुक्त बाड़बंदी से बरनाऊ चौंतड़ा निवासी पूर्ण चंद ने लिखी सफलता की कहानी

◆मुख्य मंत्री खेत संरक्षण योजना से कृषि बना फायदा का सौदा, जंगली जानवरों से सुरक्षित हो रही फसलें

जोगिंद्रनगर, जतिन लटावा

हिमाचल प्रदेश सरकार की मुख्य मंत्री खेत संरक्षण योजना किसानों के लिये वरदान से कम साबित नहीं हो रही है। इसी योजना के माध्यम से की जा रही बाड़बंदी से न केवल किसानों की फसलें बंदरों व अन्य जंगली जानवरों से बच पा रही है। बल्कि खेती-बाड़ी फायदे का सौदा भी साबित हो रही है। इसी योजना से जुडक़र जोगिन्दर नगर उपमंडल के विकास खंड चौंतड़ा के अंतर्गत ग्राम पंचायत भडयाड़ा के बरनाऊ गांव निवासी पूर्ण चंद न केवल अपनी फसलों को बचाने में कामयाब हो पाये हैं बल्कि खेती-बाड़ी फायदे का सौदा भी साबित हो रही है।
इस इस बारे ग्राम पंचायत भडयाड़ा के बरनाऊ गांव निवासी 65 वर्षीय पूर्ण चंद से बातचीत की तो उन्होने बताया कि मुख्य मंत्री खेत संरक्षण योजना के तहत सोलरयुक्त बाड़बंदी कर न केवल अपनी बेकार पड़ी पुश्तैनी जमीन को उपजाऊ बना दिया है बल्कि फसलों को भी बंदरों, जंगली एवं आवारा जानवरों से भी सुरक्षित कर लिया है। मार्च 2020 में 70:30 अनुपात में कृषि विभाग के माध्यम से लगभग पांच बीघा जमीन में साढ़े तीन लाख रूपये की लागत से कम्पोजिट बाड़बंदी की है। जिस पर सरकार ने लगभग 2 लाख 42 हजार रूपये का उपदान प्रदान किया है।
पंजाब बिजली बोर्ड से वर्ष 2014 में सेवा निवृति के बाद पूर्ण चंद ने अपनी पुश्तैनी जमीन में खेती-बाड़ी को आगे बढ़ाने का काम शुरू किया। लेकिन बंदरों एवं अन्य जंगली जानवरों के कारण उनके लिये कृषि घाटे का सौदा साबित होने लगी। उनका कहना है कि उनके पास लगभग 11-12 बीघा जमीन है लेकिन बाड़बंदी से पहले जहां महज सात से आठ क्विंटल गेहूं की पैदावार हो पाती थी तो वहीं अब बाड़बंदी के बाद 23 से 24 क्विंटल गेहूं तैयार हो रही है। इसी तरह जहां मक्की की पैदावार महज 40 से 50 किलोग्राम थी तो वहीं अब 7 से 8 क्विंटल जबकि धान की पैदावार में भी काफी वृद्धि हुई है। इसके अलावा वे मौसमी सब्जियों का भी उत्पादन कर रहे हैं जिसमें आलू, लहसुन, धनिया, मिर्च, हल्दी, टमाटर, गोभी, मटर, अदरक के साथ-साथ सोयाबीन की भी पैदावार कर रहे हैं। उनका कहना है कि उनके परिवार में 12 लोग हैं जिनके वर्ष भर की खाने की जरूरतों को वे अपने इन्हीं खेतों से ही पूरा कर लेते हैं जबकि अतिरिक्त पैदावार होने पर वे बेच भी रहे हैं।  
पूर्ण चंद कहते हैं कि उन्होने सेब के भी 100 पौधे लगाए हैं तथा पहली फसल में 50 पौधों से प्रति पौधा 20 से 25 किलोग्राम की पैदावार प्राप्त हुई है। अपने खेतों में वे स्वयं की तैयार प्राकृतिक खाद का ही इस्तेमाल कर रहे हैं, इसके लिये उन्होने कृषि विभाग के सहयोग से दो वर्मी कम्पोस्ट पिट तैयार किये हैं। जिन पर सरकार ने 12 हजार रूपये का उपदान प्रदान किया है। सिंचाई के लिये उन्होने सरकार के सहयोग से ट्यूबवेल स्थापित किया है जिस पर सरकार ने लगभग एक लाख 10 हजार रूपये का उपदान दिया है। टयूब वैल को चलाने के लिये उन्होने सोलर पंपिंग सिस्टम भी स्थापित किया है लेकिन यहां की भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यह कामयाब नहीं हो पाया है। खेतों में सिंचाई सुविधा के लिये 6 हजार क्यूसेक क्षमता का एक पानी का टैंक भी निर्मित किया है जिस पर सरकार की ओर से 70 हजार रूपये की आर्थिक मदद मिली है। उन्होने बताया कि आने वाले समय में सब्जियों एवं सेब की फसल को खराब मौसम के साथ-साथ कीट पतंगों एवं पक्षियों से बचाने के लिये हेलनेट सुविधा के लिये भी आवेदन किया है।  
पूर्ण चंद का कहना है कि सोलरयुक्त बाड़बंदी से अब न केवल उनकी फसलें बंदरों एवं अन्य आवारा व जंगली जानवरों से सुरक्षित हुई है बल्कि कृषि अब फायदे का सौदा साबित हो रहा है। उन्होने प्रदेश के किसानों विशेषकर शिक्षित व बेरोजगार युवाओं से सरकार की इन योजनाओं का लाभ उठाकर कृषि व्यवसाय को अपनाने का भी आहवान किया है।
क्या कहते हैं अधिकारी:
जब इस बारे विषयवाद विशेषज्ञ कृषि चौंतड़ा ब्लॉक जय सिंह से बातचीत की तो उनका कहना है कि मुख्य मंत्री खेत संरक्षण योजना का लाभ उठाकर किसान पूर्ण चंद एक सफल किसान बनने की ओर अग्रसर हैं। उन्होने बताया कि गत चार वर्षों के दौरान इस योजना के माध्यम से अब तक चौंतड़ा ब्लॉक में 49 किसानों की लगभग  19 हजार 538 वर्ग मीटर जमीन को सोलरयुक्त बाड़बंदी के तहत लाया गया है। जिस पर सरकार ने लगभग एक करोड़ 63 लाख रूपये बतौर उपदान मुहैया करवाए हैं।
उन्होने बताया कि इस योजना के माध्यम से व्यक्तिगत तौर पर सोलरयुक्त बाड़बंदी के लिए सरकार 80 प्रतिशत जबकि सामूहिक तौर पर 85 प्रतिशत तक उपदान मुहैया करवा रही है। इसके साथ-साथ कम्पोजिट बाड़बंदी के लिए 70 प्रतिशत तथा कांटेदार तार लगाने को 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। उन्होने ज्यादा से ज्यादा किसानों से सरकार की इस योजना का लाभ उठाने का आग्रह किया है ताकि उनकी फसलों को बंदरों, जंगली जानवरों एवं आवारा पशुओं से बचाया जा सके।

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