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भगवती को तारा और दिल सरस्वती के नाम से भी जाना जाता है

 मां भगवती उग्रतारा 10 महाविद्या में विधि महाविद्यालय भगवती को तारा और दिल सरस्वती के नाम से भी जाना जाता है

जोगिंदर नगर ,रिपोर्ट जतिन लटावा

मां भगवती उग्रतारा 10 महाविद्या में विधि महाविद्यालय भगवती को तारा और दिल सरस्वती के नाम से भी जाना जाता है मां भगवती आदि शक्ति परांबा है भगवती का प्राकट्य  सृष्टि के उस समय हुआ जब समुद्र मंथन दे कालकूट विश् उत्पन्न हुआ !

 जिसके प्रभाव से संपूर्ण संसार निशामगन हो गया और सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान महादेव ने कुछ विच को स्वयं अपने कंठ में धारण किया जिसके कारण भगवान शिव मूर्छित हो गए और भगवान शिव के मूर्छित होने पर के मूर्छित होने पर ब्रह्मा विष्णु और अन्य देवताओं की प्रार्थना पर भगवती मां पार्वती जी ने तारा अवतार दिया और भगवान शिव को अपना अमृत में स्तनपान करवाया जिसके प्रभाव से भगवान महादेव की मूर्ति दूर हुई और वे पुनः जागृत हुई जब भगवान शिव जागृत हुए तो उन्होंने मां भगवती को माता कह कर संबोधित किया भगवान विष्णु के माता कहने पर नारायण जिनके आराध्या भगवान शिव हैं उनकी भी माता हुई जब ब्रह्मा विष्णु महेश ने माता रा को माता का स्थान प्रदान किया और उनका वंदन किया तो समस्त संसार की भगवती माता हो इसलिए भगवती को जगदंबा जगतारिणी अर्थात जगत को तारने वाली कहां गया!

मां भगवती का स्थान हिमाचल प्रदेश में शिमला मैं भी है और मां भगवती का रथ स्वरूप मंडी टारना में स्थित है मां भगवती के पास दूर दूर से श्रद्धालु अपने कष्टों के निवारण के लिए आते हैं चाहे वह भूत बाधा हो या कोई भी तंत्र बाधा भगवती उन सब का निवारण करती हैं पुत्र दायिनी संतान दायिनी भी हैं मां भगवती वर्ष में अश्विनी नवरात्रि पर अष्टमी के दिन दंपतियों की संतान नहीं है उन्हें फल रूप में संतान का आशीर्वाद भी देती हैं मां भगवती  उग्र स्वभाव की हैं इसीलिए इन्हें उग्रतारा कहा जाता है। 



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