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हिमाचल प्रदेश राज्य स्तरीय समन्वय समिति (एसएलसीसी) की 18वीं बैठक में क्रिप्टोकरेंसी का मामला छाया रहा

                                          धोखाधड़ी करने वाली संस्थाओं पर कार्रवाई करेगी समन्वय समिति

शिमला,रिपोर्ट नीरज डोगरा 

हिमाचल प्रदेश राज्य स्तरीय समन्वय समिति (एसएलसीसी) की 18वीं बैठक में क्रिप्टोकरेंसी का मामला छाया रहा। इसमें धोखाधड़ी करने वाली संस्थाओं पर कार्रवाई करने की बात कही गई। राज्य स्तरीय समन्वय समिति (एसएलसीसी) सभी नियामकों और सरकार की प्रवर्तन एजेंसियों के बीच जानकारी साझा करने में सहयोगी निकाय है। 

सरकार की प्रवर्तन एजेंसियों में गृह विभाग, वित्त विभाग, विधि विभाग, आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) आदि शामिल हैं। समिति का उद्देश्य धोखाधड़ी करने वाली संस्थाओं की ओर से जमा की अनधिकृत स्वीकृति की घटनाओं से निपटना और उन्हें रोकना है। बैठक की अध्यक्षता भारतीय रिजर्व बैंक शिमला के क्षेत्रीय निदेशक आरएस अमर और सरकार के प्रधान सचिव वित्त मनीष गर्ग ने की।हिमाचल प्रदेश में सामने आई क्रिप्टोकरेंसी के नाम पर धोखाधड़ी मामले पर अधिकारियों ने विस्तृत चर्चा की। इसमें बताया गया कि शातिर किस तरह से लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं। ये लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए मन को लुभावने वाले सपने दिखाते हैं। एक बार पैसा निवेश करने के बाद यह शातिर अपना बोरिया बिस्तर लेकर भाग जाते हैं। क्रिप्टोकरेंसी ठगी मामले में भी हजारों लोगों को ठगा गया है। बैठक में वित्त विभाग, सतर्कता विभाग, साइबर सेल के वरिष्ठ अधिकारी और सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार, सेबी, कंपनी रजिस्ट्रार (आरओसी), आईसीएआई और भारतीय रिजर्व बैंक के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।




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