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गगल एयरपोर्ट पर हवाई जहाजों को लैंड करवाना पायलट के लिए चुनौती

                             खराब मौसम में गगल एयरपोर्ट पर लैंडिंग में बाधा बन रहा छोटा रनवे

गग्गल,ब्यूरो रिपोर्ट 

बरसात का मौसम शुरू होते ही गगल एयरपोर्ट पर हवाई जहाजों को लैंड करवाना पायलट के लिए चुनौती से कम नहीं है। गगल एयरपोर्ट का रनवे छोटा होने के कारण पायलटों को लैंडिंग के दौरान दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिसके चलते खराब मौसम में अकसर गगल एयरपोर्ट पर आने वाली फ्लाइटें रद्द हो जाती हैं। माना जा रहा है कि एयरपोर्ट का विस्तार होने पर ऐसी दिक्कतों से राहत मिल सकती है। 

जानकारी के अनुसार गगल एयरपोर्ट का मौजूदा समय में रनवे 1370 मीटर के करीब है।जानकारों की मानें तो जहाज को लैंड करने के लिए 5000 मीटर की विजिबिलिटी की जरूरत होती है, जो रनवे छोटा होने के कारण खराब मौसम में पायलटों को नहीं मिल पाती है। इसके चलते उन्हें यहां पर लैंड करने के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। गगल एयरपोर्ट पर खराब मौसम में भी लैंडिंग करवाने के लिए सितंबर 2016 को गगल एयरपोर्ट पर डॉप्लर वैरी हाई फ्रिक्वेंसी ओमनी डायरेक्शनल रेंज (डीवीओआर) को स्थापित करने का प्रपोजल तैयार किया गया था।वहीं इस डीवीओआर को नवंबर, 2018 में स्थापित कर इसे चालू कर दिया गया। 

उम्मीद जताई जा रही थी कि इस सिस्टम के लगने से खराब मौसम में भी पायलटों को लैंड करने के लिए उचित विजिबिलिटी मिल जाएगी, लेकिन रनवे की लंबाई कम होने के कारण खराब मौसम में यहां पर लैंडिंग के दौरान जरूरी विजिबिलिटी पायलटों को नहीं मिल पा रही है, जिसके चलते यहां पर अकसर खराब मौसम में फ्लाइटों को रद्द करना पड़ता है।गगल एयरपोर्ट सभी प्रकार के उपकरणों से लैस है, लेकिन यहां के रनवे की लंबाई कम है। इसके चलते पायलटों को पर्याप्त विजिबिलिटी नहीं मिल पाती, जिसके चलते खराब मौसम में जहाज नहीं उतर पाते हैं। गगल एयरपोर्ट का विस्तार होने के बाद यहां पर इस तरह की दिक्कतों से निजात मिलेगी।





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