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डीपीआर में खामियां, अधिग्रहण भी गलत तरीके से

                                                               खड़े पहाड़ों को बिना सोचे-समझे काटा

शिमला,ब्यूरो रिपोर्ट 

हिमाचल प्रदेश में फोरलेन सड़कों की डीपीआर और निर्माण में खामियां बरसात में तबाही का कारण बन रही है। पहले लागत बचाने के लिए जमीन का सही तरीके से अधिग्रहण नहीं किया और उसके बाद खड़े पहाड़ काट दिए। फोरलेन बनाने के लिए मैदानों में अपनाई जाने वाली तकनीक को पहाड़ों में लागू करने की चूक भारी पड़ रही है। अवैज्ञानिक तरीके से नब्बे डिग्री में पहाड़ की कटिंग से सड़कों के आसपास भारी भूस्खलन के साथ मकान जमींदोज हो रहे हैं। 

कटिंग से जर्जर हुए पहाड़ बरसात में दरक रहे हैं। बड़ी-बड़ी चट्टानें उखड़ रही हैं।इसके आसपास के कई लोगों के पास न जमीन बची है और न ही घर। पर्यटन, उद्योग के लिए फोरलेन सड़कें हिमाचल की जरूरत है, लेकिन इनके निर्माण की लापरवाही ने कई लोगों को बेघर कर दिया। हिमाचल में हजारों करोड़ रुपये की लागत से किरतपुर-मंडी-मनाली, परवाणू-शिमला, शिमला-मटौर और पठानकोट-मंडी फोरलेन का निर्माण कार्य चल रहा तीनों फोरलेन सड़कों के आसपास भारी नुकसान हुआ है। पहाड़ियों को चीरकर बनाए जा रहे किरतपुर-चूक के सबसे बड़े गवाह हैं। केंद्रीय राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने माना है कि किरतपुर-मनाली फोरलेन के आसपास तबाही के लिए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) बनाने वाली एजेंसियां जिम्मेदार हैं। बिना विस्तृत अध्ययन के घर बैठे गूगल की मदद से डीपीआर बनाई जा रही हैं।मंडी जिले के सुंदरनगर क्षेत्र के गांव चमुखा निवासी जयराम का परिवार बर्बादी की इस कहानी को बयां कर कर रहा है। 

किरतपुर-मनाली फोरलेन के किनारे जयराम का परिवार खुशी-खुशी रह रहा था। उनके घर से करीब 30 फीट दूर फोरलेन पर 90 डिग्री की सीधी कटिंग की गई। कंपैक्ट रोलर चला तो उनके घर में दरारें आ गईं। नेरचौक के भौर गांव के रहने वाले जोगिंद्र वालिया ने बताया कि फोरलेन से हुए भूस्खलन से उनके पुश्तैनी खेत पूरी तरह से तबाह हो चुके हैं।शिमला के भट्ठाकुफर की माठू कॉलोनी में भी निर्माणाधीन परवाणू-शिमला फोरलेन के किनारे केस-2 कंक्रीट का भवन ढह गया। इसकी भारी बरसात से साढ़े चार मंजिला सभी मंजिलें ताश के पत्तों की तरह बिखर गई। आधी रात को आसपास के लोगों को भी जान बचाकर भागना पड़ा। जीवन भर की कमाई से इस भवन को बनाने वाली रंजना वर्मा को अपनी बहन के घर रहने को मजबूर होना पड़ा है।नेशनल हाईवे विंग के मुख्य अभियंता अजय कपूर ने माना कि हिमाचल में नेशनल हाईवे अथॉरिटी की ओर से बनाए जा रहे फोरलेन में चूक हुई है। 46 मीटर की जगह 32 मीटर जमीन का अधिग्रहण किया गया। जब जमीन ही कम अधिग्रहित की गई तो स्वाभाविक रूप से कम भूमि होने पर एनएचएचएआई को सीधी कटिंग करनी पड़ी।


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