मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू का बड़ा खुलासा नशे के नेटवर्क में सरकारी तंत्र तक पैठ
धर्मशाला, ब्यूरो रिपोर्ट
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने राज्य में नशा माफिया पर निर्णायक कार्रवाई शुरू करते हुए सभी जिला प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि नशा बेचकर अर्जित की गईं संपत्तियों की निशानदेही कर 10 दिसंबर तक विस्तृत रिपोर्ट सरकार को भेजी जाए। सरकार इन अवैध संपत्तियों को ध्वस्त करने की तैयारी में है। सीएम ने मंगलवार को तपोवन विधानसभा परिसर में नारकोटिक्स को-ऑर्डिनेशन सेंटर की छठी राज्य स्तरीय बैठक के बाद बातचीत में बताया कि प्रदेश की 234 अत्यधिक संवेदनशील पंचायतों में सीआईडी और पुलिस बल की विशेष तैनाती कर दी गई है। उपायुक्तों को इन पंचायतों में नशा निवारण समितियां गठित करने और प्रत्येक जिले में नियमित बैठकें करने के निर्देश दिए गए हैं।
सीएम ने खुलासा किया कि चिट्टा तस्करी में 60 सरकारी कर्मचारी संलिप्त पाए गए हैं, जिनमें 15 पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। इनमें से पांच पुलिस कर्मियों को बर्खास्त किया जा चुका है, जबकि अन्य के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है। सरकार ने सभी विभागों से ऐसे कर्मचारियों का ब्योरा 10 दिसंबर तक भेजने को कहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अब अधिकारियों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) में नशा नियंत्रण से जुड़े सप्लाई, डिमांड और हार्म रिडक्शन के मानकों को शामिल किया जाएगा।
सीएम ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में प्रदेश में एनडीपीएस मामलों में 28 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है। इस अवधि में 5,642 मामले दर्ज किए, 8216 गिरफ्तारियां हुईं और 36.657 किलो चिट्टा बरामद किया गया। प्रदेश में लागू पीआईटी-एनडीपीएस के तहत 46 तस्करों को हिरासत में लिया गया और 48 करोड़ रुपये की अवैध संपत्तियां जब्त की गईं। सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है, जिसने पंचायतों को रेड, येलो और ग्रीन श्रेणियों में बांटकर 12,000 व्यक्तियों की पहचान की है और यह मॉडल अब राष्ट्रीय स्तर पर अनुकरणीय बन रहा है।


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