हर साल सामने आ रहे नए मामले, समय पर जांच और जागरूकता से बचाव संभव;
शिमला, ब्यूरो रिपोर्ट
हिमाचल प्रदेश में 35 से 55 आयु वर्ग की महिलाएं सर्वाइकल कैंसर की चपेट में आ रही हैं। आईजीएमसी में हर साल 3000 से 3200 कैंसर के मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें से 200 महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर की पुष्टि हो रही है। जिला चंबा और सिरमौर से सर्वाइकल कैंसर के मरीज ज्यादा आ रहे हैं। स्तन कैंसर के बाद दूसरे नंबर पर सर्वाइकल कैंसर है। शुरुआती लक्षण पाए जाने पर मरीज इस बीमारी से मुक्त हो जाता है, लेकिन सेकंड स्टेज पर 82 से 90 फीसदी और तीसरी स्टेज में 55 फीसदी तक मरीजों के ठीक होने की संभावना रहती है। चौथी स्टेज में मरीजों के 10 फीसदी ठीक हो सकता है।
आईजीएमसी में वर्ष 2020 से 2025 के बीच 1127 महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर की पुष्टि की गई। इनमें अधिकांश मरीज 35 से 55 वर्ष की आयु वर्ग की हैं, जो यह दर्शाता है कि मध्यम आयु वर्ग की महिलाएं इस बीमारी की अधिक चपेट में आ रही हैं। सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) संक्रमण है। असुरक्षित यौन संबंध, कम उम्र में विवाह, बार-बार गर्भधारण और नियमित जांच का अभाव इसके जोखिम कारकों में शामिल हैं। शुरुआती चरण में इस कैंसर के लक्षण स्पष्ट नहीं होते, जिससे कई बार रोग का पता देर से चलता है। अनियमित रक्तस्राव, और असामान्य स्राव इसके प्रमुख संकेत माने जाते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि एचपीवी टीकाकरण से सर्वाइकल कैंसर होने की संभावना 85 फीसदी तक कम की जा सकती है। यदि किशोरावस्था में ही बेटियों को यह टीका लगाया जाए तो भविष्य में इस घातक बीमारी से काफी हद तक बचाव संभव है। इसके अलावा नियमित पैप स्मीयर जांच और समय-समय पर स्क्रीनिंग भी बेहद जरूरी है। एचपीवी टीकाकरण से केवल सर्वाइकल कैंसर ही नहीं, बल्कि गर्भाशय, मलाशय, गुदा और ऑर्गेरिजियल (ओरोफैरिंजियल) कैंसर के मामलों में भी कमी आ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता, समय पर जांच और टीकाकरण के माध्यम से हिमाचल में सर्वाइकल कैंसर के बढ़ते मामलों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। अस्पतालों में सर्वाइकल कैंसर की इलाज कीमो और रेडिएशन से होता है। स्कूलों में छात्राओं को एचपीवी टीका लगाए जाने से यह बीमारी काफी हद तक काबू में आ सकती है।
सर्वाइकल कैंसर गर्भाशय ग्रीवा (बच्चेदानी के निचले वाला हिस्सा) में होने वाला कैंसर है। जो मुख्य रूप से ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) के कारण होता है। टीका लगाए जाने से इस बीमारी पर अंकुश लगाया जा सकता है। कम उम्र में टीकाकरण करने से वायरस के संपर्क से पहले सर्वोत्तम सुरक्षा मिलती है।
सर्वाइकल कैंसर (गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर) के मुख्य लक्षणों में योनि से असामान्य रक्तस्राव, विशेषकर यौन संबंध के बाद या पीरियड्स के बीच, दुर्गंधयुक्त सफेद पानी आना, पेल्विक (पेड़ू) में लगातार दर्द और पेट के निचले हिस्से में परेशानी शामिल है। शुरुआती स्टेज में लक्षण न के बराबर होते हैं, लेकिन कैंसर बढ़ने पर कमर दर्द, पैर में सूजन और थकावट हो सकती है

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