बड़ी उपलब्धि: बाल टीकाकरण कवरेज 99 प्रतिशत, किशोरों पर भी नजर
सोलन,ब्यूरो रिपोर्ट
देश में बच्चों का टीकाकरण कवरेज 99 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। अब मां के गर्भधारण से बच्चे के जन्म और 16 वर्ष की आयु तक स्वास्थ्य विभाग की ओर से निरंतर निगरानी की जा रही है। इस पूरी अवधि में 27 टीके लगाए जाते हैं। टीकाकरण की निगरानी के लिए स्वास्थ्य विभाग का यू-विन पोर्टल बेहद कारगर साबित हो रहा है।
यदि कोई बच्चा टीकाकरण से छूट जाता है तो यह पोर्टल आशा कार्यकर्ता समेत पंजीकृत स्वास्थ्य कर्मियों को मोबाइल पर अलर्ट भेजता है। टीकाकरण पूर्ण होने तक यह अलर्ट प्रक्रिया जारी रहती है।देश में हर वर्ष करीब दो से ढाई करोड़ बच्चे जन्म लेते हैं। गर्भावस्था पंजीकरण के साथ ही लाभार्थियों की निगरानी यू-विन जैसे डिजिटल प्लेटफार्म से की जाती है। सरकार सुनिश्चित कर रही है कि प्रत्येक गर्भवती महिला को पांच प्रसवपूर्व जांच उपलब्ध हों, जिनमें से कम से कम एक जांच विशेषज्ञ चिकित्सक द्वारा की जाए, ताकि सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित हो सके। इसका परिणाम है कि देश में संस्थागत प्रसव का प्रतिशत 79 से बढ़कर 89 प्रतिशत तक पहुंच गया है।सीआरआई कसौली की निदेशक डॉ. डिंपल कसाना ने कहा कि संस्थान में जीएमपी मानकों के तहत वैक्सीन बनाई जा रही हैं।
2016 में सीजीएमपी लैब के उद्घाटन के बाद वैज्ञानिकों ने कई जानलेवा बीमारियों से सुरक्षा देने वाली वैक्सीन विकसित की हैं।वर्ष 2016 में आधुनिक सीजीएमपी लैब की स्थापना के बाद केंद्रीय अनुसंधान संस्थान कसौली ने टिटनेस और डिप्थीरिया (टीडी) वैक्सीन का निर्माण किया। संस्थान को विपणन प्राधिकरण और निर्माण और बिक्री का लाइसेंस प्राप्त हो चुका है। इसके अलावा वाणिज्यिक उत्पादन भी शुरू कर दिया है। आने वाले समय में सीआरआई कसौली को और बड़ी जिम्मेदारियां सौंपने की योजना है।देश में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में केंद्र सरकार का बड़ा योगदान रहा है। 2014 में देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 385 थी, जो अब बढ़कर 808 हो चुकी है। वैज्ञानिक वैक्सीन निर्माण और नई खोजों से देश की स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत कर रहे हैं।


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