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गुच्छी की खेती में बड़ी सफलता: अब पॉलीहाउस में सब्जियों की तरह उगाई जाएगी दुर्लभ फसल

                वैज्ञानिकों के सफल शोध से महंगी और दुर्लभ गुच्छी मशरूम की खेती होगी आसान

सोलन,ब्यूरो रिपोर्ट 

पहाड़ों में प्राकृतिक रूप से उगने वाली औषधीय गुणों से भरपूर गुच्छी को सब्जियों की तरह अब पॉलीहाउस में भी उगा सकेंगे। खुंब अनुसंधान एवं निदेशालय में गुच्छी के बीज पर चल रहा शोध सफल हो गया है। मशरूम उत्पादकों और किसानों के लिए इसे उगाना सब्जियों जितना आसान होगा। 

वर्तमान में गुच्छी सिर्फ प्राकृतिक रूप से ही उगती थी। इस बार पॉलीहाउस में गुच्छी का अच्छा आकार में बंपर क्रॉप आई है। इसके अलावा निदेशालय की ओर से प्रदेश के एक साथ तीन तरह के तापमान में शोध चल रहा है। इसमें सबसे ठंडे, मध्यम और उच्च तापमान वाले इलाकों में इसे उगाने की तैयारी है। इसे लेकर खुंब निदेशालय सोलन (डीएमआर) ने पालमपुर, सिरमौर और चौपाल के किसानों को गुच्छी का बीज दिया है।इन क्षेत्रों में भी जल्द फ्रूट बॉडी आने की भी उम्मीद है। डीएमआर के विशेषज्ञ डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि अभी तक गुच्छी साढ़े छह हजार फीट से अधिक की ऊंचाई पर देवदार, कायल आदि के जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगती है। इसे खेतों में उगाना संभव नहीं था, क्योंकि इसका बीज विकसित नहीं किया जा सका था।

 खुंब अनुसंधान एवं निदेशालय को इसे उगाने में सफलता मिली है। जंगलों में पाई जाने वाली दुर्लभ गुच्छी पर अब एक साथ तीन तरह के तापमान में शोध चल रहा है। गुच्छी मशरूम में विटामिन डी, सी, के, आयरन, कॉपर, जिंक व फॉस्फोरस पाया जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार इसका सेवन बोन हेल्थ व मानसिक तनाव को खत्म करने में सहायक होता है। दिल के रोगों व शरीर की चोट को भी जल्द भरने में यह लाभकारी है।खुंब निदेशालय के कार्यकारी निदेशक डॉ. ब्रिज लाल अत्रि ने बताया कि गुच्छी बीज का सफल शोध रहा है। इस बार अच्छे आकार की फ्रुट बॉडी के साथ बपंर क्रॉप भी आई है। इसके अलावा अन्य जिलों में किसानों को भी बीज ट्रायल के लिए दिया गया है। इसके भी अच्छे परिणाम आने की उम्मीद है।





 

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