टैक्स कलेक्शन घटने की आशंका, सरकार के सामने बजट संतुलन की चुनौती
शिमला,ब्यूरो रिपोर्ट
हिमाचल प्रदेश के बजट आंकड़ों के अनुसार राज्य के अपने कर राजस्व में साल 2026-27 में गिरावट का अनुमान लगाया गया है। वर्ष 2024-25 में कुल कर राजस्व 6,980.94 करोड़ रुपये रहा, जो 2025-26 में बढ़कर 9,368.48 करोड़ आंका जा रहा है, लेकिन 2026-27 के लिए यह घटकर 8,662.79 करोड़ रहने का अनुमान है।मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की ओर से दिए गए बजट अनुमानों के आंकड़ों के अनुसार राज्य आबकारी सबसे बड़ा राजस्व स्रोत बना हुआ है, जो 2026-27 में 3,174.07 करोड़ यानी 36.64 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
2025-26 में बेशक यह 3,256.20 करोड़ एकत्र होगा, मगर यह कुल कर राजस्व का करीब 34.76 प्रतिशत रहने जा रहा है। 2024-25 में यह 2,699.42 करोड़ रहा, जो कुल कर राजस्व का 38.67 प्रतिशत रहा।इसके अलावा सेल्स टैक्स वैट से 2,290.97 करोड़ रुपये यानी 26.45 प्रतिशत और वाहन कर से 1,068.72 करोड़ यानी 12.34 प्रतिशत की आय होने की उम्मीद है। बिजली पर कर एवं शुल्क में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी जा रही है, जो 2024-25 के 494.88 करोड़ से बढ़कर 2026-27 में 852.05 करोड़ यानी 9.84 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। स्टांप व रजिस्ट्रेशन शुल्क से भी राजस्व बढ़कर 653.76 करोड़ होने का अनुमान है। विशेषज्ञों के अनुसार 2026-27 में कर राजस्व में गिरावट यह संकेत देती है कि राज्य की आय में अस्थिरता बनी हुई है। ऐसे में सरकार के सामने अपने राजस्व स्रोतों को मजबूत करने और वित्तीय संतुलन बनाए रखने की चुनौती बनी रहेगी।अर्थशास्त्री प्रो. एनके शारदा ने कहा कि जहां संभव हो, वहां टैक्स का दायरा और दरें दोनों को बढ़ाने से ही अपने करों से राजस्व बढ़ सकता है। इसका सरकार को प्रयास करना चाहिए।
स्थानीय निकाय विशेष रूप से नगर निकायों के स्तर पर संसाधनों को नहीं बढ़ाया जा पा रहा है। हालांकि कर केवल ऐसे ही लगाए जाने चाहिए, जिनका आम आदमी पर बोझ नहीं पड़े। सब्सिडी को निगेटिव टैक्स माना जाता है। इसे आर्थिक दृष्टि से कमजोर परिवारों पर ही लक्षित करना चाहिए। आबकारी नीति में भी सुधार किया जा सकता है।वित्त वर्ष 2026-27 में कर्मचारियों के वेतन पर 14,721.55 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जबकि 2025-26 में 14,716.65 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। 2024-25 में 13,827.34 करोड़ रुपये व्यय हुए थे। अगले बजट में पेंशन पर 10,493 करोड़ रुपये व्यय होंगे। चालू वित्त वर्ष में 10,322.94 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। 2024-25 में 9383.65 करोड़ रुपये व्यय हुए थे। दिहाड़ी पर 315.40 करोड़ रुपये व्यय होंगे, जो चालू वित्त वर्ष में 292.50 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। 2024-25 में 307.87 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। यानी वेतन पेंशन और दिहाड़ी पर खर्च पिछले वर्षों से अधिक बढ़ रहा है।


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