सोती रही केंद्र सरकार’ टिप्पणी बनी चर्चा का विषय
शिमला, ब्यूरो रिपोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने देरी के कारण दायर उस रिट याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें केंद्र सरकार ने 2020 के एक पुराने आदेश को चुनौती दी थी। अदालत ने कहा कि इतने लंबे समय तक केंद्र सरकार सोती रही। यदि सरकार लंबे समय तक अदालती आदेशों पर चुप्पी साधे रहती है, तो बाद में वह अपनी मर्जी से उन आदेशों को चुनौती नहीं दे सकती।
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने पाया कि केंद्र सरकार 2020 के आदेश के बाद वर्षों तक शांत बैठी रही। जब 2025 में ट्रिब्यूनल ने आदेश का पालन न होने पर सख्त रुख अपनाया और अवमानना जैसी स्थिति बनी, तब सरकार ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने कहा है कि जब किसी आदेश को लंबे समय तक चुनौती नहीं दी जाती, तो उस पक्ष के पक्ष में एक कानूनी अधिकार बन जाता है जिसने केस जीता है।
प्रशासनिक आदेशों या वरिष्ठता के दावों को उचित समय के भीतर चुनौती दी जानी चाहिए। अदालत ने कहा कि विभाग ने समय रहते कानूनी उपचार नहीं अपनाया और अब इस स्तर पर मेरिट के आधार पर मामले को दोबारा खोलने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
.jpg)
.jpg)
0 Comments