रोस्टर संशोधन को लेकर गरमाया माहौल, विपक्ष ने लगाए जोरदार नारे
शिमला,ब्यूरो रिपोर्ट
पंचायतीराज चुनावों से पहले उपायुक्तों को रोस्टर में पांच फीसदी तक बदलाव के अधिकार देने के मुद्दे पर विधानसभा में माहौल गरमाया रहा। विपक्षी दल भाजपा ने इस विषय पर नियम- 67 के तहत काम रोको प्रस्ताव लाकर चर्चा की मांग की।
हंगामे के चलते प्रश्नकाल नहीं हो सका। सदन की कार्यवाही को भी कुछ समय के लिए स्थगित करना पड़ा। दोबारा कार्यवाही शुरू होने पर भाजपा विधायक रणधीर शर्मा, राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी, नेता विपक्ष जयराम ठाकुर और मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने अपनी-अपनी बात रखी। अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने सरकार के जवाब से संतुष्ट होते हुए नियम 67 के तहत चर्चा की अनुमति नहीं दी। इससे नाराज भाजपा विधायकों ने सदन में नारेबाजी की और बाद में वाकआउट कर दिया।सुबह विधायक रणधीर शर्मा ने नियम-67 के तहत काम रोको प्रस्ताव लाते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि यह फैसला चुनावों को टालने और राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से लिया गया है।
सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि इस निर्णय से चुनाव प्रक्रिया प्रभावित नहीं होगी। बदलाव का अधिकार देने से पारदर्शिता पर सवाल खड़े होंगे। दिसंबर 2025 या जनवरी 2026 में पंचायतीराज चुनाव प्रस्तावित थे। सरकार ने पहले चुनाव आयोग से टकराव लिया। इस मामले पर जब कुछ लोग हाईकोर्ट गए तो सरकार सुप्रीम कोर्ट चली गई। इसी बीच पंचायतों का पुनर्गठन शुरू किया गया। बिना नियमों के मनमर्जी से पंचायतें बनाई गई। अब पंचायतों और पंचायत समीतियों के रोस्टर में बदलाव करने की अधिसूचना जारी कर दी है। चुनाव आयोग से भी इस बाबत चर्चा नहीं की गई। जवाब में राजस्व मंत्री जगत सिंह ने कहा कि वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर कई पंचायतें बार-बार आरक्षित हो रही हैं। सीमित दायरे में उपायुक्तों को रोस्टर में पांच फीसदी तक बदलाव का अधिकार दिया गया है, ताकि संतुलन बनाया जा सके।

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