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शिमला में अब महंगे होंगे परमिट, प्रतिबंधित सड़कों के लिए पांच गुना फीस का प्रावधान 🚧

                       प्रतिबंधित मार्गों पर चलने के लिए देना होगा ज्यादा शुल्क, विधेयक पास 🏛️

शिमला,ब्यूरो रिपोर्ट 

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बुधवार को सदन में शिमला शहर की बंधित और प्रतिबंधित सड़कों की परमिट फीस को पांच गुना करने से संबंधित संशोधन विधेयक को पारित करने का प्रस्ताव रखा। विपक्ष के सदन से बाहर चले जाने के बाद यह संशोधन विधेयक पारित कर दिया गया। राजधानी शिमला की बंधित और प्रतिबंधित सड़कों पर सफर अब महंगा हो जाएगा। 

मंगलवार को इन सड़कों के परमिट की फीस में पांच गुना बढ़ोतरी का प्रस्ताव विधानसभा में पेश किया गया और इसे बुधवार को पारित कर दिया गया।इस प्रस्ताव में इन सड़कों पर बिना परमिट के गाड़ियां चलाने वालों के खिलाफ जुर्माना करने और दस दिन की कैद का भी प्रावधान जोड़ा गया है। मुख्यमंत्री ने शिमला की सड़कों का उपयोग करने वालों और पैदल चलने वालों के लिए लोक सुरक्षा एवं सुविधा संशोधन विधेयक 2026 को पारित करने का सदन में प्रस्ताव रखा। इस विधेयक में तीन धाराओं में संशोधन और एक नई धारा को जोड़ा गया है। धारा-6 में बंधित सड़कों के लिए परमिट देने या इनके नवीकरण का प्रावधान है। बंधित सड़क पर निजी वाहनों के परमिट के लिए प्रोसेसिंग फीस 100 रुपये है। यह अब 500 रुपये होगी। परमिट जारी करने के लिए यह 2,000 रुपये है, जो अब 10,000 रुपये होगी।धारा-7 में प्रतिबंधित सड़कों के लिए प्रोसेसिंग फीस 100 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये और परमिट का शुल्क 1000 रुपये से बढ़ाकर 5000 रुपये किया जाएगा। धारा-8 में अस्थायी पास का आवेदन शुल्क 200 से बढ़ाकर 1000 रुपये किया जाएगा।

 प्रतिदिन के हिसाब से 100 रुपये के स्थान पर इसे 500 रुपये किया जाएगा और यह सात दिनों तक देय होगा। धारा 12 में भी संशोधन करते हुए प्रावधान किया गया है कि अगर कोई व्यक्ति बंधित सड़क पर बगैर परमिट के गाड़ी चलाएगा तो 10 हजार रुपये जुर्माना होगा। प्रतिबंधित सड़क के लिए यह पांच हजार होगा। अभी तक 3 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान रहा है। इसके अलावा अलग-अलग मामलों में अपराध पर 10 से 15 दिनों की कैद की भी व्यवस्था होगी।लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने बुधवार को हिमाचल प्रदेश लिफ्ट संशोधन विधेयक 2026 विधानसभा के पटल पर रखा। इसमें लिफ्ट के साथ एस्केलैटर्स और ट्रेवलैटर्स भी जोड़ दिए हैं। वर्ष 2007 के बाद यह संशोधन किया जा रहा है। निजी भवन मालिकों या अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए लिफ्ट लगाने पर पंजीकरण शुल्क 2500 रुपये निर्धारित करने का प्रावधान किया गया है। अगर सरकार लगाती है तो पंजीकरण शुल्क नहीं लगेगा। नियमों का पालन न करने वालों को पहली बार 5000 रुपये जुर्माना, अगर उल्लंघन जारी रहता है तो 45 हजार रुपये बतौर जुर्माना वसूल की जा सकेगा। 

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