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निर्विरोध चुनी गई पंचायतों को प्रोत्साहन राशि देने पर मंथन, विभाग ने दिए तीन विकल्प

                   बिना चुनाव चुनी पंचायतों के लिए फंड की तैयारी, सरकार के सामने तीन प्रस्ताव

शिमला,ब्यूरो रिपोर्ट 

हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर तैयारियों के बीच निर्विरोध चुनी जाने वाली पंचायतों को प्रोत्साहित करने की नीति पर मंथन चल रहा है। पंचायतीराज विभाग ने सरकार को इस संबंध में तीन विकल्प सुझाते हुए विस्तृत प्रस्ताव भेजा है। इनमें निर्विरोध पंचायतों को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि को बढ़ाने, वर्तमान में राशि न देने या पूर्व की तरह प्रति पंचायत 10 लाख रुपये दिए जाने को लेकर विकल्प शामिल हैं। पिछली बार प्रदेश में 104 पंचायतें निर्विरोध चुनी गई थीं, जिन्हें सरकार की ओर से प्रति पंचायत 10 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई थी।

इस पहल का कारण पंचायत चुनाव में आपसी सहमति को बढ़ावा देना था, जिससे चुनावी खर्च और विवादों में कमी लाई जा सके। प्रोत्साहन राशि बढ़ाने से अधिक पंचायतें निर्विरोध चुनी जा सकती हैं, जिससे चुनाव प्रक्रिया सरल और कम खर्चीली होगी। तीसरे विकल्प के तौर पर विभाग ने पूर्व की व्यवस्था को जारी रखने का सुझाव दिया है, जिसके तहत पंचायतों को 10 लाख रुपये दिए जाते रहे हैं। विभाग का मानना है कि यह मॉडल पहले से प्रभावी रहा है और इसमें बड़े बदलाव की आवश्यकता नहीं है। फाइल में तीनों विकल्पों के फायदे और संभावित प्रभावों का भी उल्लेख किया गया है। अंतिम निर्णय अब राज्य सरकार को लेना है। माना जा रहा है कि सरकार वित्तीय स्थिति, पंचायतों की संख्या और चुनावी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए जल्द ही इस पर फैसला ले सकती है।हिमाचल में पंचायतीराज संस्थाओं को लेकर शैक्षणिक योग्यता नहीं होगी। सोशल मीडिया में तरह तरह की अफवाहें फैलाई जा रही हैं कि पंचायत प्रधान का चुनाव लड़ने के लिए 10वीं पास होना अनिवार्य है। पंचायतीराज विभाग ने इसे सिरे से खारिज किया है।

 प्रदेश में प्रस्तावित पंचायत चुनाव की तैयारियों को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी जिलों के उपायुक्त (डीसी) और पुलिस अधीक्षकों (एसपी) की अहम बैठक 16 अप्रैल को बुलाई है। यह बैठक वर्चुअल माध्यम से होगी। इसमें चुनावी तैयारियों की व्यापक समीक्षा की जाएगी। साथ ही निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान करने के लिए नई गाइडलाइन भी जारी की जाएगी। आयोग जिला निर्वाचन अधिकारियों की तैयारियों का विस्तृत आकलन करेगा। इसमें मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन, मतदान केंद्रों की स्थिति, कर्मचारियों की तैनाती, सुरक्षा व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा होगी।बैठक में कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर विशेष जोर रहेगा। पुलिस अधीक्षकों से संवेदनशील और अति संवेदनशील मतदान केंद्रों की पहचान, पुलिस बल की तैनाती और चुनाव के दौरान किसी भी प्रकार की अवांछित गतिविधियों को रोकने की रणनीति पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी जाएगी। इसके अलावा आदर्श आचार संहिता के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर भी दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए कुछ नई गाइडलाइन जारी किए जाने की संभावना है। इनमें मतदान केंद्रों पर सीसीटीवी निगरानी और डिजिटल मॉनीटरिंग जैसे उपाय सुझाए जा सकते हैं।


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