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हिमाचल हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: आपात शक्तियों के दुरुपयोग पर नाराज़गी

                                       ‘ब्रेक’ की प्रथा पर सवाल, कहा शोषण की ओर ले जा रही व्यवस्था

शिमला, ब्यूरो रिपोर्ट 

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में हिमाचल प्रदेश सरकारी कर्मचारी (भर्ती एवं सेवा की शर्तें) अधिनियम, 2024 की सांविधानिकता को चुनौती दी गई थी। सरकारी कर्मी भर्ती एवं सेवा शर्तें अधिनियम रद्द करते हुए अदालत ने फैसले की शुरुआत में अपने आदेश में राज्य सरकार की 50 वर्षों पुरानी नियुक्ति नीतियों की कड़ी आलोचना की है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि इस साझा निर्णय में मुख्य रूप से नए अधिनियम की कानूनी वैधता की जांच की जा रही है।

अदालत ने पाया कि सरकार ने आपातकालीन स्थितियों के लिए दी गई शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया। 89 दिनों की नियुक्तियां देकर और फिर ब्रेक देकर दोबारा रखने की प्रथा को शोषणकारी करार दिया गया। आदेश में कहा गया कि जब भी अदालतों ने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाया, सरकार ने उसका तोड़ निकालने के लिए नियुक्तियों के नाम बदल दिए, जैसे विद्या उपासक, पैरा-टीचर्स, पीटीए और पैट शिक्षक। कोर्ट ने दोहराया कि बिना भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के अनुबंध या अस्थायी आधार पर नियुक्तियां करना असांविधानिक है। 

कई मामलों में यह भी देखा गया कि चहेतों को पिछले दरवाजे से प्रवेश देने के लिए नियमों की अनदेखी की गई। हाईकोर्ट ने विभिन्न पुराने मामलों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि अनुबंध या अस्थायी कर्मचारियों को भी नियमित कर्मचारियों की तरह वेतन वृद्धि और पेंशन लाभ का अधिकार है। अनुबंध सेवा की अवधि को पेंशन के लिए गिना जाना चाहिए। सरकार को एक आदर्श नियोक्ता के रूप में कार्य करना चाहिए, न कि बेरोजगारों का शोषण करना चाहिए।  अदालत ने कहा कि यदि इस फैसले के बाद भी कर्मचारियों की कुछ शिकायतें शेष रहती हैं, तो वे नई याचिकाएं दायर करने के लिए स्वतंत्र होंगे। 

गौरतलब है कि इस अधिनियम को 7 फरवरी 2025 को राज्यपाल की मंजूरी मिली थी। इस कानून के माध्यम से सरकार ने स्पष्ट किया है कि अनुबंध के आधार पर की गई नियुक्तियां लोक सेवा का हिस्सा नहीं मानी जाएंगी। साथ ही अनुबंध अवधि की सेवा को वरिष्ठता या अन्य सेवा लाभों के लिए नहीं गिना जाएगा। सरकार का तर्क था कि यदि अनुबंध कर्मचारियों को नियुक्ति की पहली तिथि से वरिष्ठता दी गई, तो इससे पिछले 21 वर्षों की वरिष्ठता सूचियां बदलनी पड़ेंगी, जिससे कई नियमित कर्मचारी डिमोट हो सकते हैं और राजकोष पर भारी वित्तीय बोझ पड़ेगा। संविधान के अनुच्छेद 309 के तहत सरकार को सेवा नियम बनाने का पूरा अधिकार है। 


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