बेहतर इलाज के लिए सरकार की पहल, पीजी सीटें बढ़ाने की तैयारी
शिमला,ब्यूरो रिपोर्ट
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि मेडिकल कॉलेजों में पीजी की सीटें बढ़ाई जा रही हैं। टांडा मेडिकल कॉलेज में 57, नेरचौक में 29, नाहन में 32, चंबा में 33, हमीरपुर में 67 और आईजीएमसी में 96 पीजी सीटें बढ़ेंगी। उन्होंने कहा कि सीटों के बढ़ने के बाद इन मेडिकल कॉलेजों के कामकाज में तेजी आएगी और मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध हो पाएगा।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने यह जानकारी बुधवार को आयोजित स्वास्थ्य शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए दी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।मुख्यमंत्री ने नए मेडिकल कॉलेजों में प्रोफेसरों और टांडा मेडिकल कॉलेज में सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की कमी को देखते हुए अगले तीन वर्षों के लिए उनकी सेवानिवृत्ति की आयु 65 वर्ष करने को कहा। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ने पर किसी भी स्तर पर प्रमोशन को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि असिस्टेंट और एसोसिएट प्रोफेसरों की कमी को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार उन्हें डेजिग्नेट कर रही है। वर्तमान सरकार की प्राथमिकता मेडिकल कॉलेजों के सभी विभागों को सुदृढ़ करने की है और विशेष रूप से डाइग्नोसिस सुविधाओं को और मजबूत किया जाएगा।
इस वर्ष नवम्बर माह तक सभी मेडिकल कॉलेजों में नर्सों के खाली पदों को भर दिया जाएगा और तकनीकी स्टाफ भी पर्याप्त संख्या में उपलब्ध होगा। राज्य सरकार 3000 करोड़ रुपये खर्च कर प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में आधुनिक मशीनें और उपकरण खरीद रही है। सभी स्वास्थ्य संस्थानों में स्टाफ की कमी को भी दूर किया जा रहा है।सुक्खू ने कहा कि स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में सुधार राज्य सरकार की प्राथमिकता है और इसके लिए धन की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में स्वास्थ्य क्षेत्र में अभूतपूर्व सुधार होगा और प्रदेश में हैल्थ टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार जल्द ही मेडिकल कॉलेज चंबा के चरण-2 का कार्य आरंभ करने जा रही है, जिस पर 192 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके साथ ही नाहन मेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए भी राज्य सरकार 500 करोड़ रुपये प्रदान करेगी। बैठक में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल, स्वास्थ्य सचिव एम. सुधा देवी, निदेशक स्वास्थ्य शिक्षा डॉ. राकेश शर्मा और सभी मेडिकल कॉलेजों के प्रधानाचार्य वर्चुअल माध्यम से शामिल रहे।

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