शिमला में सेब की पैदावार में गिरावट, नए इलाकों में बढ़ा बागवानी रकबा
शिमला,ब्यूरो रिपोर्ट
हिमाचल प्रदेश में सेब उत्पादन का भूगोल बदल रहा है। एक अध्ययन में सामने आया है कि जहां एक ओर राज्य के पारंपरिक सेब उत्पादक क्षेत्र शिमला में उत्पादन वृद्धि दर में हल्की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं सिरमौर, स्पीति और मंडी जैसे जिलों में सेब उत्पादन तेजी से बढ़ा है।
यह अध्ययन डॉ. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी के सामाजिक विज्ञान विभाग के डॉ. शिल्पा रानी, डॉ. सुभाष शर्मा और डॉ. अनुरिता ने किया है।अध्ययन में वर्ष 1974-75 से 2022-23 तक के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। आंकड़ों के अनुसार सिरमौर जिले में सेब उत्पादन की सर्वाधिक वार्षिक वृद्धि दर 27.70 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि स्पीति में 10.30 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। जलवायु परिवर्तन और अनुकूल किस्मों के इस्तेमाल ने नए क्षेत्रों में सेब उत्पादन को बढ़ावा दिया है। अध्ययन के अनुसार जिन क्षेत्रों में पर्याप्त चिलिंग ऑवर्स उपलब्ध हो रहे हैं, वहां सेब उत्पादन बढ़ रहा है।
वहीं, राज्य में सबसे अधिक सेब क्षेत्र और उत्पादन वाले शिमला जिले में कुल अवधि के दौरान सेब उत्पादन वृद्धि दर में 3.70 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। विशेषज्ञों के अनुसार बदलती जलवायु, असमान वर्षा, उत्पादन लागत में वृद्धि और पारंपरिक बगीचों की सीमाएं इसके पीछे प्रमुख कारण हैं। अध्ययन में यह भी कहा गया है कि राज्य की सेब अर्थव्यवस्था में स्थिरता लाने के लिए उच्च घनत्व पौधारोपण, क्षेत्र विशेष के अनुकूल किस्मों का चयन और आधुनिक बागवानी तकनीकों को अपनाना जरूरी होगा। शोधकर्ताओं ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की बागवानी अर्थव्यवस्था अब पारंपरिक मॉडल से निकलकर जलवायु-अनुकूल और तकनीक आधारित मॉडल की ओर बढ़ रही है।


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