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आपदा प्रबंधन के प्रशिक्षण से संबंधित कैंप आयोजित


नूरपूर,संजीव महाजन
हिमाचल प्रदेश के आम नागरिकों को प्राकृतिक व कृत्रिम आपदा के समय आत्मरक्षा व अन्य पड़ोसियों की सुरक्षा करने के गुर सिखाने हेतु आज 14 वीं वाहिनी एनडीआरएफ नूरपुर के कैंप परिसर में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला परचोरी जिला चंबा के 3 अध्यापकों और 50 स्कूली बच्चों को 14 वीं वहिनी एनडीआरएफ के पदाधिकारियों द्वारा आपदा प्रबंधन के प्रशिक्षण से संबंधित कैंप लगाया गया।
कैंप के दौरान बाढ आगजनी भूकंप अन्य किसी प्राकृतिक कृत्रिम आपदा के समय में होने वाले नुकसान एवं उससे बचाव के तरीके अध्यापकों और स्कूली बच्चों को सिखाए गए अध्यापकों और स्कूली बच्चों को आपदा के दौरान आत्मरक्षा करने और दूसरों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने का प्रशिक्षण दिया गया एनडीआरएफ के पदाधिकारियों द्वारा अध्यापकों और स्कूली बच्चों को आपदा प्रबंधन उपकरणों के बारे में जानकारी और भूकंप आने पर की जाने वाली कार्यवाही व बचाव के तरीकों पर प्रदर्शन दिखाया गया।
इसके साथ ही कैंप परिसर में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर नीरज कुमार ठाकुर द्वितीय कमान की अध्यक्षता में वाहिनी में उपस्थित सभी पदाधिकारियों उनके परिवारजनों और राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला पर चोरी तहसील कटिहार जिला चंबा के अध्यापकों और छात्रों के साथ मनाया गया।
नीरज ठाकुर द्वितीय कुमार 14वी वाहिनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर महिला सशक्तिकरण की बात करते हुए महिलाओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को बहुत मतलब दिया गया है । समाज में पुरुषों के समान अधिकार बा समान देने के संबंध में समस्त महिलाओं को संबोधित किया। उनके द्वारा यह भी बताया गया कि आज के दौर में महिलाएं पुरुषों से किसी भी क्षेत्र में उन से कम नहीं है बल्कि उनके साथ कंधे से कंधे कंधा मिलाकर चल रही हैं। उन्होंने अपनी मेहनत और मेघा शक्ति के बल पर हर क्षेत्र में प्रवीणता अर्जित कर ली है किसी कारण आज महिलाएं बिजनेस उद्यमी कार्यों और वेतन रहित श्रम के रूप में भी अर्थव्यवस्था में काफी बड़ा योगदान देती हैं साथ ही राजनीति खेल सेना पुलिस व बैंकिंग उच्च पदों पर भी आसीन होकर बढ़-चढ़कर अपना योगदान दे रही है कारपोरेटस जगत की बात करें तो इस क्षेत्र में आज महिलाओं का ही वर्चस्व है नारी सदैव पुरुष के साथ कंधे से कंधा मिलाकर तो चलती है बल्कि उनसे भी अधिक जिम्मेदारियों का निर्वाहन एक मां बहन बेटी पत्नी और दोस्त के रूप में करती है।
अंत में यस्य पूज्यंते नारयसतु तन्त्र रमंते देवता । अर्थात या नारी की पूजा होती है वहां पर देवता निवास करते हैं अतः नारी सम्माननीय है। शब्दों के साथ और एक बार फिर से महिलाओं को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए संबोधन का समापन किया।

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