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पालमपुर स्थित गोपालपुर के चिड़ियाघर को बनाओ आकर्षित

                                        32 सालों से कई मूल भूत सुविधाओं व सहूलियतों के लिए तरस रहा 

पालमपुर,रिपोर्ट नेहा धीमान 

मुख्यमंत्री जी देहरा में भी चिड़ियाघर बनाओ मगर पालमपुर स्थित गोपालपुर के चिड़ियाघर को भी आकर्षण का प्राकृतिक चेतना केन्द्र बनाओ,किसी भी चिड़ियाघर का आकर्षण एवं शान राष्ट्रीय जानवर टाईगर से होती है । 

लेकिन विडम्बना है कि  प्राकृतिक के आपार सौन्दर्य से भरपूर खूबसूरत हरे भरे जंगल के बीच सामने टिमटिमाती शानदार बर्फीली पहाड़ियों एवं धोलाधार के आंचल में स्थित ऐसा चिड़ियाघर शायद कहीं ही देखने को मिलेगा। जो कि पिछले 32 सालों से कई मूल भूत सुविधाओं व सहूलियतों के लिए तरस रहा है। यह प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पालमपुर के पूर्व विधायक प्रवीन कुमार ने कहा कि सुक्खू सरकार द्वारा देहरा स्थित वनखण्डी में  चिड़ियाघर की घोषणा के उपरांत पालमपुर की जनता द्वारा यह कयास लगाये जाने लगे हैं कि निकट भविष्य में शायद सरकार अव गोपालपुर के चिड़ियाघर के प्रति  रूचि कम दिखाये । ऐसे में पूर्व विधायक ने माननीय मुख्यमंत्री जी से आग्रह किया है कि यहाँ की जनता के इस भ्रम को तोडने के लिए जो कई वर्षो से मांग चली आ रही है कि इस चिड़ियाघर के अन्दर भी नर व मादा टाईगर होने चाहिए ।

 पूर्व विधायक ने कहा यहाँ चिड़ियाघर के कर्मचारियों का भी दवी जुवान में कहना है जैसे ही पर्यटक चिड़ियाघर परिसर में प्रवेश करते तो उनकी सबसे बडी लालसा अर्थात पहली पसन्द टाईगर को देखने की होती है। जैसे ही उन्हे बताया जाता है कि यहाँ टाईगर नहीं हैं तो वे निराश मन से ही चिड़ियाघर का चक्कर काट कर चले जाते हैं । पूर्व विधायक ने कहा कि 90 वे दशक में तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री शान्ता कुमार जी ने इस प्राकृतिक चेतना नामक चिड़ियाघर की स्थापना की थी । विषय बेहद खेद का है इन 32 वर्षों में जिस ढंग से इस चिड़ियाघर का विकास होना चाहिए था मसलन के तोर पर  विभिनन प्रकार की वन्य प्राणी प्रजातियों के अतिरिक्त जो मूल भूत सुविधाएँ व सहूलियतें  होनी चाहिए थी वह प्रगति इस चिड़ियाघर की आज दिन तक नहीं हो पाई । हालांकि बतौर विधायक जो सम्भव हो सका है करने का प्रयास किया है।

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