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जिला हमीरपुर के किसी भी अस्पताल में आज तक आई बैंक (नेत्र बैंक) स्थापित नहीं हो पाया

                                   हमीरपुर में आंखें कर रहे दान, टांडा मेडिकल कॉलेज में हो रही संभाल

हमीरपुर,ब्यूरो रिपोर्ट 

जिला हमीरपुर के किसी भी अस्पताल में आज तक आई बैंक (नेत्र बैंक) स्थापित नहीं हो पाया। जिले नेत्र रोग विशेषज्ञ हैं और आई कलेक्शन सेंटर भी स्थापित किए गए हैं, लेकिन नेत्र बैंक आज नहीं बनाया गया है। ऐसे में जिस व्यक्ति की आंखों को निकाला जाता है, उन्हें तुरंत टांडा मेडिकल कॉलेज भेजना पड़ता है। डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में नेत्र रोग वार्ड की रोजाना की ओपीडी 200 से 250 के करीब है और बेहतरीन सुविधाएं मिलने के कारण यहां पर दूरदराज से लोग इलाज करवाने आते हैं। जिले में ऐेसेे कई लोग हैं जिन्होंने नेत्रदान किया हुआ है।

गत दिवस भी एक बुजुर्ग की मृत्यु के बाद कॉर्निया प्रत्यारोपण किया गया और बाद में उन्हें टांडा मेडिकल कॉलेज भेजा गया। ऐसे में अगर यह सुविधा हमीरपुर में ही उपलब्ध हो जाती है तो यह आंखें टांडा अस्पताल नहीं भेजनी पड़ती। शहरवासी सुरेश, ममता, विजय, प्रीतिका, संतोष और रणजीत सिंह आदि ने कहा कि मेडिकल कॉलेज में आई बैंक बनाया जाए ताकि यहां पर ही हर सुविधा उपलब्ध हो सके। वहीं, इस बारे मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रमेश भारती ने कहा कि नेत्र बैंक की स्थापना नहीं हो पाई है।नेत्र बैंक कॉर्निया को इकट्ठा करने (कटाई), प्रसंस्करण करने और उन्हें प्रशिक्षित कॉर्नियल ग्राफ्ट सर्जनों को वितरित करने का संस्थान हैं। यहां पर आंखों को दो से आठ डिग्री सेल्सियस पर एक नम कक्ष में संग्रहित किया जा सकता है ताकि बाद में आंखों के टेस्ट कर प्रत्यारोपित आंखों को किसी और व्यक्ति को लगाया जा सके।




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