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एनएच पर टारिंग की जगह मिट्टी डालने से बढ़ी फिसलन, हादसों का खतरा

                                 ये कैसा सुधार, टू और फोरलेन के सपने दिखाकर गड्ढों में भर दी मिट्टी

मंडी,ब्यूरो रिपोर्ट 

सामरिक दृष्टि से अहम मंडी-पठानकोट हाईवे की जोगिंद्रनगर से मंडी 56 किलोमीटर सड़क को कभी टू और फोरलेन के सब्जबाग दिखाकर राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग अब तारकोल से टारिंग करना भी भूल गया है। अब चिकनी मिट्टी से क्षतिग्रस्त सड़क को सुधारने के प्रयास एनएचएआई से शुरू किए हैं। इससे सड़क दुर्घटना की आंशका भी बढ गई हैं।

जोगिंद्रनगर से मंडी तक हाईवे की इस सड़क पर गलू के समीप चिकनी मिट्टी को बिछाकर दो पहिया वाहनों की दिक्कत सबसे अधिक बढ़ गई हैं। कीचड़ से फिसलन बढ़ जाने से चौपहिया वाहनों का संतुलन भी हाइवे की सड़क पर डगमगाने लगा है। उरला तक सड़क के कुछ हिस्सों में तारकोल के बजाय बिछाई गई चिकनी मिट्टी बाहरी राज्यों के पर्यटक वाहनों के लिए मुसीबत बनती जा रही है।कोटरोपी में सड़क समतल न होने हर रोज भारी वाहनों के हिचकोलों से यात्रियों की सांसें फूल रही हैं। यही नहीं, विपरीत दिशा से आने वाले वाहनों को सुरक्षित रखना भी वाहन चालकों के लिए मुश्किल होता जा है।

रविवार को जोगिंद्रनगर से मंडी हाईवे की सड़क की बदहाली पर वाहन चालक मुनीष, मोहित, विजय, अमित ने बताया कि संकीर्ण सड़क पर तारकोल की जगह बिछाई गई चिकनी मिट्टी कीचड से भी लबालब होने से फिसलन बढ़ रही है। एनएच पर जगह-जगह गड्ढों की भरमार है। बताया कि गलू के समीप सड़क ठीक न होने से साल 2012 में परिवहन निगम की एक बस भी अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी थी। करीब 12 यात्रियों की जान गई थी। करीब तीस यात्रियों को गहरी चोट लगी थी। बावजूद इसके जोगिंद्रनगर से मंडी तक हाईवे की सड़क का सुधार 50 साल में नहीं हो पाया है।उधर, एनएचएआई के तकनीकी अधिकारी साहिल जोशी ने बताया कि जोगिंद्रनगर से मंडी हाईवे की सड़क को टू या फोरलेन बनाने की संभावना एनएचएआई विभाग तलाश रहा है। सड़क के विस्तार कार्यों के अब तक किए सर्वे पर जल्द अधिकारिक निर्णय की समीक्षा के बाद नई सड़क निर्माण और मरम्मत कार्य शुरू होंगे। बहरहाल घटा से मंडी तक हाईवे की सड़क के सुधार कार्य पर एनएचएआई विभाग अपने दायित्व के निर्वहन पर गंभीर है।




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