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हिमाचल में जस के तस हेरिटेज रेल ट्रैक

                                हिमाचल प्रदेश में पुराने रेलवे ट्रैक बरकरार, नई लाइनें धीमी

काँगड़ा , ब्यूरो रिपोर्ट 

रेल विस्तार के मामले में हिमाचल प्रदेश की जनता को उम्मीद से कम मिल रहा है। कालका-शिमला और पठानकोट-जोगिंद्रनगर पुरातात्विक ट्रैक अंग्रेजों के युग से संबंधित हैं। इन्हें एक इंच भी नहीं बढ़ाया गया है। अंब से तलवाड़ा का रास्ता धीरे-धीरे चल रहा है। 


भानुपल्ली-बिलासपुर रेलवे लाइन का निर्माण अभी भी जारी है, लेकिन ट्रैक बिछना अभी नहीं शुरू हुआ है। बद्दी-चंडीगढ़ ट्रैक बिछाने के लिए जमीन को समतल करने का काम अभी भी जारी है। हमीरपुर-ऊना और पांवटा-जगाधरी मार्गों के लिए अभी तक इंतजार करना पड़ेगा। 


हिमाचल प्रदेश में हर बार चुनाव के समय केंद्र की ओर से कई चुनावी वादे किए जाते हैं। कालका-शिमला विश्व धरोहर रेललाइन का विस्तार सबसे बड़ा वादा है। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सोलन और शिमला जिले में रेलवे लाइन का महत्व दो मुख्य कारणों से है। इसमें शिमला, कसौली, कुफरी और चायल जैसे पर्यटक स्थलों के लिए रेलवे है, जबकि सोलन के बीबीएन में औद्योगिक क्षेत्र के लिए रेलवे है।  


किंतु आज, 121 वर्ष बाद भी कालका-शिमला रेलवे लाइन पर एक इंच भी विस्तार नहीं हुआ है। 1903 में अंग्रेजों ने 96.6 किमी लंबी रेलवे लाइन बनाई। रेलगाड़ी अंग्रेजों के समय में शिमला के पुराने बस अड्डे तक पहुंचती थी, लेकिन अब इससे करीब एक किलोमीटर पहले तक ही पहुंच पाती है। रेलवे लाइन की विस्तार की घोषणाएं झूठी निकलीं। आजादी के सात दशक बाद भी, यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की अस्थायी सूची में शामिल कांगड़ा घाटी रेल का एक इंच भी विस्तार नहीं हुआ। 


चुनावों के समय राजनीतिक दल इसके विस्तार की याद करते हैं। यह रेलवे ट्रैक धौलाधार की तलहटी से गुजरता है और पालमपुर के चाय बगान, बज्रेश्वरी माता मंदिर, श्री चामुंडा माता मंदिर और बैजनाथ का प्रसिद्ध शिव मंदिर भी है। चक्की पुल की क्षति से पठानकोट के निकट यह ट्रेन बंद हो गई है। रेलवे बोर्ड ने कांगड़ा से जोगिंद्रनगर के बीच ट्रेन को हाल ही में बहाल किया है, लेकिन कांगड़ा से पठानकोट तक ट्रेन नहीं चलती है। 

अशोक शर्मा, प्रदीप शर्मा, राहुल पठानिया, सुरेंद्र कुमार और अश्वनी कपूर, जो नियमित रेल यात्रियों में हैं, ने कहा कि नैरोगेज से ब्राडग्रेज में बदलने और रेलवे विस्तार का मुद्दा महत्वपूर्ण है। वर्तमान सांसद किशन कपूर ने कहा कि सदन में कांगड़ा घाटी रेलवे का मुद्दा भी उठाया गया है। इसके कारण कांगड़ा घाटी रेलवे को बजट मिल पाया है। रेलवे स्टेशनों बैजनाथ-पपरोला और पंचरुखी के जीर्णोद्धार, पर्याप्त सुविधाओं, पार्किंग, अंडरपास और ओवरब्रिज के निर्माण का शिलान्यास हुआ है।

 इसके अलावा, केंद्र ने करोड़ों की सौगातें भी की हैं।  ऊना के अंब के दौलतपुर चौक से आगे तलवाड़ा पंजाब तक चलने वाली रेल सेवा का लोग बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। रेलवे ट्रैक को दौलतपुर चौक से तलवाड़ा, पंजाब तक बनाने का लक्ष्य दिसंबर 2025 तक पूरा करना है। 16.97 हेक्टेयर (कुल 89.92 हेक्टेयर) राज्य की जमीन में से ली गई हैं। शेष जमीन पर समझौता अभी नहीं हुआ है। दूसरी ओर, ऊना से हमीरपुर तक चलने वाली रेलवे लाइन की दूरी 41 किलोमीटर होगी। डीपीआर केंद्र विचाराधीन है। 

2016 में रेल मंत्रालय ने पहली बार लाइन का सर्वे किया था।  भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी रेलवे लाइन का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। इसकी दूरी भानुपल्ली से बिलासपुर तक 52 किमी है। इसे मार्च 2025 तक बनाने का लक्ष्य है। बध्यात से बैरी तक 11.1 किमी का अतिरिक्त भूमि अधिग्रहण कार्य किया जाना है। 538 बीघा निजी जमीन का अधिग्रहण बैरी से बध्यात तक प्रस्तावित है। भूमि अधिग्रहण की फाइल सरकार को मंजूरी के लिए भेजी गई है। हालाँकि, 11.1 किलोमीटर के लिए पहले ही 802 करोड़ का टेंडर रेल विकास निगम ने जारी किया है। पहले 24 किलोमीटर के ट्रैक को अप्रैल में टेंडर अवॉर्ड मिलेगा। 

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