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खरीद केंद्रों में 2500 क्विंटल तक हुई गेहूं की खरीद

                                              जटिल प्रक्रिया के कारण मंडियों में नहीं आए किसान

ऊना,ब्यूरो रिपोर्ट 

जिला में कृषि ऊपज बाजार समिति (एपीएमसी) की ओर से गेहूं की खरीद के लिए बनाए गए दो खरीद केंद्रों को किसानों की बेरुखी का सामना करना पड़ा है। गेहूं की कटाई का अंतिम चरण पूरा हो चुका है, लेकिन दोनों खरीद केंद्रों में मात्र 2500 क्विंटल गेहूं पहुंची है, जबकि मई माह के 15 दिन बीत चुके हैं और 10 जून को खरीद प्रक्रिया बंद हो जाएगी। उधर, किसानों का कहना है कि सरकारी खरीद केंद्रों में फसल बेचने से जुड़ी औपचारिकताएं बहुत हैं, जबकि व्यापारी घर से फसल खरीद रहे हैं और कोई औपचारिकताएं भी नहीं है। सरकारी खरीद केंद्रों की ओर इस बार कम संख्या में रुख करने को लेकर क्षेत्र के कुछ किसानों ने अपने विचार इस प्रकार रखे हैं।

किसान विनोद कुमार ने कहा कि हमें अपनी फसल बेचने के लिए औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती हैं, जो कि सही नहीं है। ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग से लेकर टोकन मिलने के बाद बताए गए समय पर मंडी पहुंचना पड़ता है। वहीं, कोई औपचारिकता में खामी मिलने पर फसल खरीद नहीं होती। फसल लेकर खरीद केंद्रों में पहुंचने के लिए भी गाड़ियों का तेल खर्च होता है।किसान अमनदीप ने कहा कि कब मौसम खराब हो जाए, कोई नहीं कह सकता। ऐसी स्थिति में फसल खेतों से 20 से 30 किलोमीटर दूर मंडियों तक पहुंचाना जोखिम भरा होता है। व्यापारी घर और खेतों से फसल खरीद रहे हैं। कीमत में कोई अंतर नहीं है तो क्यों जोखिम उठाना।

किसान सुनील कुमार बताते हैं कि सरकारी खरीद केंद्रों में फसल की कीमत का भुगतान बैंक खाते में 24 घंटे के भीतर होता है, जबकि व्यापारी फसल के पैसे हाथों हाथ देते हैं। ऐसे में उनकी पहली पसंद व्यापारी हैं।किसान रोहित कुमार कहते हैं कि सरकारी मंडियों में बड़े पंखे लगाकर हल्के दानों को एक ओर कर दिया जाता है, जो मोटे दाने होते हैं, उसे ही अच्छा गेहूं मानकर खरीद होती है, जबकि मौसम की मार से दाने के कम विकसित होने में किसानों को कोई कसूर नहीं। जब व्यापारी उनसे गेहूं खरीदता है तो ऐसी कोई परेशानी नहीं होती।किसान अमित कुमार ने कहा कि सरकारी खरीद केंद्रों तक फसलों को लेकर जाने के लिए गाड़ी का किराया अलग से चुकाना पड़ता है। जब वही दाम घर बैठे मिल रहे हैं तो खरीद केंद्रों में जाने की परेशानी कौन उठाएगा।किसान सुरेश कुमार का कहना है कि किसानों को ऑनलाइन आवेदन करने का नहीं पता। पहले लोकमित्र केंद्र जाकर पंजीकरण करवाओ फिर बारी के हिसाब से मंडी जाना पड़ता है। यह औपचारिकता बंद होनी चाहिए और खरीद प्रक्रिया को आसान किया जाए।जिला में टकारला और रामपुर में दो खरीद केंद्र है। फसल खरीद के समय ऑनलाइन औपचारिकताएं रिकाॅर्ड को बनाकर रखने के लिए की जाती है। इससे खरीद प्रक्रिया भी सुगम तरीके से चलती है। अभी 2500 क्विंटल गेहूं की फसल मंडियों में पहुंची है, जबकि खरीद प्रक्रिया जारी है।





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