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गेहूं की फसल की पैदावार अब घाटे का सौदा बनती जा रही है

                                 घाटे का सौदा बनी खेती, मंडियों में आधे भी नहीं मिल रहे गेहूं के दाम

चम्बा,ब्यूरो रिपोर्ट 

जिले में गेहूं की फसल की पैदावार अब घाटे का सौदा बनती जा रही है। किसानों का कहना है कि एक किलो गेहूं की फसल तैयार करने के लिए उनका लगभग सौ रुपये का खर्च आ रहा है।किसानों को मंडियों में फसल के लिए उठाए गए खर्च के आधे दाम भी नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में उन्हें घाटा उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पहले पहले किसान गेहूं की फसल तैयार कर परिवार का पालन-पोषण करते थे। अब वही फसल घाटे का सौदा बनकर रह गई है।

किसानों में करनैल सिंह, बर्फी राम, परस राम, वीरेंद्र कुमार, भीम सिंह, अशोक कुमार, सरवन सिंह, बलविंद्र कुमार का कहना है कि पहले 13 किलोग्राम की थ्रेसिंग के चालीस रुपये लिए जाते थे, मगर अब यह बढ़कर पचास रुपये हो गए हैं। इसके अलावा खेती की ज़ुताई भी दो बार करनी पड़ती थी। इसमें ढाई बिस्वा भूमि के दो सौ रुपये चुकाने पड़ रहे हैं। इसके अलावा फसल को कीड़ों से बचाने के लिए दवाइयों पर अलग से खर्च करना पड़ रहा है। बताया कि किसान को अब मेहनत का मेहनताना भी नसीब नहीं हो रहा है। उन्हें अपनी फसल अब मंडियों के बजाय घरों में ही रखनी पड़ रही है। अगर कहीं पंजाब की मंडियों से आढ़ती पहुंचते तो वे बीस रुपये किलोग्राम के हिसाब से गेहूं की खरीद करते हैं। इससे उन्हें घाटा उठाना पड़ रहा है। कुल मिलाकर गेहूं की बिजाई से लेकर थ्रेसिंग तक का खर्च अब किसानों को महंगा पड़ने लगा है।उधर, कृषि उपनिदेशक चंबा डॉ. कुलदीप धीमान का कहना है कि थ्रेसिंग का कार्य निजी रहता है। इसकी कीमतें थ्रेसिंग के मालिक ही तय करते है। इसमें विभाग का कोई हस्तक्षेप नहीं है।







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