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मंडी में दो दिन से दहक रहे जंगल

                                                            24 घंटों में 12 जगह भड़की आग

मंडी,ब्यूरो रिपोर्ट 

जिला मंडी में जंगलों में आग की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। पिछले 24 घंटों में हुई 12 अलग-अलग घटनाओं में लाखों की वन संपदा जलकर राख हो गई है। दो दिनों में जिला के कई जंगल दहक रहे हैं। सबसे अधिक जंगलों में आग की घटनाएं नाचन, मंडी, सुकेत और जोगिंद्रनगर वन मंडलों में सामने आई हैं। इनमें कई नए पौधे, असंख्य जीव जंतु और औषधीय पौधे जलकर राख हो गए हैं।

मंडी और नाचन की सीमाओं को जोड़ने वाले धुआंदेवी के जंगलों में भयंकर आग लग गई और वीरवार को रातभर जंगल धधकते रहे। यह आग इतनी बेकाबू हो गई कि वन कर्मचारियों और लोगों को आग बुझाने का कोई मार्ग भी समझ नहीं आया। हालांकि सड़कों के साथ लगी आग को वन अधिकारियों और कर्मचारियों एवं फायर ब्रिगेड की टीमों ने शुक्रवार सुबह तक बुझाते रहे। मगर बीच जंगल में आग पर काबू नहीं पाया गया। शुक्रवार सायं तक रुक-रुक कर आने वाले हवा के झोंकों के साथ फिर आग सुलगती रही। वहीं, मंडी के रेहड़ाधार और कोटली के जंगलों में भी आग ने विकराल रूप धारण किया हुआ है।भयंकर गर्मी के बीच जंगल की आग को बुझाना वन विभाग के लिए चुनौती बना हुआ है। 

इस बीच आग के कारण धुआं इतना अधिक हो रहा है कि सांस लेना भी कठिन हो रहा है। वनों के साथ लगते इलाकों में ग्रामीणों को भी खतरा बना हुआ है। ऐसे हालात में भी वन विभाग के कर्मचारी और अधिकारी काम में जुटे हुए हैं।डीएफओ मंडी का अतिरिक्त कार्यभार देख रहे अमरीश कुमार ने कहा कि 24 घंटों में मंडी मंडल सहित जिलेभर में आग की 12 घटनाएं सामने आई हैं। सभी वन कर्मचारी और अधिकारी आग बुझाने में दिन रात जुटे हुए हैं। मगर शरारती तत्वों आग लगाने से बाज नहीं आ रहे। उन्होंने कहा कि असंख्य जीव जंतुओं और वन संपदा को बचाने में विभाग का सहयोग करें। खुद भी आग न लगाएं और दूसरों को भी ऐसा करने से रोकें।नाचन क्षेत्र के बूथों के लिए वीरवार शाम को जब पोलिंग पार्टियां जा रही थी तो इस दौरान धुआंदेवी क्षेत्र के जंगलों में लगी आग बेकाबू हो गई और रास्ते भी असुरक्षित हो गए। इस बीच पार्टियों को सुरक्षित बूथों तक ले जाना प्रशासन और विभाग के लिए चुनौती बन गया। इस दौरान मंडी के डीएफओ सहित उनकी टीम के सदस्यों और प्रशासन की ओर से एसडीएम और अन्य अधिकारियों ने टीम को सुरक्षित बूथों तक पहुंचाने के लिए इन्हें देर रात वाया पंडोह मार्ग से जाने की व्यवस्था की गई।





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