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क्रशर, मिक्सिंग प्लांट को उद्योग की श्रेणी से बाहर करे राज्य सरकार : नड्डा

                                      हिमाचल प्रदेश में एक वातावरण बनाने का प्रयास किया जा रहा है 

बिलासपुर,ब्यूरो रिपोर्ट 

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा है कि क्रशर और मिक्सिंग प्लांट को उद्योग की श्रेणी में रखने से हिमाचल में नेशनल हाईवे के निर्माण प्रभावित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर और फोन कर यह मामला उठाया जाएगा। सरकार इसे उद्योग की श्रेणी से बाहर करे।

 नड्डा ने कांग्रेस सरकार पर समदो-काजा हाईवे के निर्माण के लिए फॉरेस्ट क्लीयरेंस नहीं देने का आरोप लगाया।बचत भवन में पत्रकार वार्ता में नड्डा ने कहा कि प्रदेश सरकार ने 23 अप्रैल 2024 को अधिसूचना जारी की है। इसके मुताबिक राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए जो क्रशर और मिक्सिंग प्लांट लगे हैं, उनके लिए भी हर साल अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया है। हालांकि ये उद्योग की श्रेणी में नहीं आने चाहिए। उन्होंने कहा कि समदो-काजा सड़क का निर्माण बीआरओ को करना था। सड़क के लिए वन विभाग की मंजूरी लेनी है जो राज्य सरकार की ओर से दी जानी है। अभी तक मंजूरी नहीं दी गई है।नड्डा ने व्यास नदी पर ड्रेजिंग न होने को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि राज्य सरकार को इस दिशा में काम करना चाहिए। यदि इस समय पर नहीं किया तो आने वाले समय में काफी परेशानियां हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल सरकार स्वास्थ्य के क्षेत्र में मिले बजट को खर्च नहीं कर पा रही है। 

केंद्र सरकार की ओर से आयुष्मान इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए दिए गए पैसे का 21% ही खर्च हुआ है। 15वें वित्त आयोग में स्वास्थ्य के क्षेत्र में जितना पैसा दिया था, वह 25% ही खर्च हुआ है और इसकी अवधि 2025 में खत्म हो जाएगी। ऐसे में सरकार को इस दिशा में बेहतर काम करना चाहिए।नड्डा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में एक वातावरण बनाने का प्रयास किया जा रहा है कि केंद्र सरकार हिमाचल बारे ध्यान नहीं दे रही है पर गलती तो राज्य सरकार की है जो केंद्र से आए पैसे को खर्च नहीं कर पा रही है। 2021 से 2025 तक स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से ही आयुष्मान भारत हेल्थ इन्फास्ट्रक्चर मिशन के तहत 360 करोड़ 11 लाख रुपये प्रदान किए गए हैं, जिसमें से प्रदेश सरकार केवल 78 करोड़ ही खर्च कर पाई है। इस योजना के तहत प्रदेश में 73 ब्लाक लेबल पब्लिक हेल्थ यूनिट बनाए जाने प्रस्तावित हैं, जिनमें से छह ही बन पाए हैं जबकि 14 के टेंडर हुए हैं। प्रदेश को 15वें वित्तायोग से 521 करोड़ रुपये दिए गए हैं, जिसमें से केवल 128 करोड़ 62 लाख रुपये ही खर्च हुए हैं। उन्होंने कहा कि 25 मई को मुख्यमंत्री उनसे मिलने आए थे। उन्होंने जाइका से पैसा दिलवाने का आग्रह किया था जिस पर 30 जून को 1138 करोड़ रुपये केंद्र ने मंजूर किए। 


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