Ticker

6/recent/ticker-posts

Header Ads Widget

अनुबंध सेवा को वरिष्ठता में शामिल करने वाले फैसले पर लगी रोक

                                    वरिष्ठता के लिए अनुबंध सेवा गिनने के एकल जज के निर्णय पर रोक

शिमला,ब्यूरो रिपोर्ट 

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अनुबंध सेवा की अवधि को वरिष्ठता और परिणामी पदोन्नति लाभों के लिए गिनने वाले एकल जज के फैसले पर रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने प्रतिवादी को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है। अगली तारीख चार सप्ताह बाद होगी।

महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि नियमितीकरण आदेश की धारा 9 के तहत अनुबंध सेवा को योग्यता सेवा में नहीं गिना जाना था और वरिष्ठता भी नियमितीकरण की तारीख से ही मानी जानी थी। एकल न्यायाधीश ने राज्य सरकार को प्रतिवादी को वरिष्ठता और परिणामी पदोन्नति लाभ देने के आदेश दिए थे। हालांकि, मौद्रिक लाभ से इन्कार कर दिया था। एकल पीठ का यह निर्णय ताज मोहम्मद और अन्य बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य मामले में 3 अगस्त 2023 को दिए गए फैसले पर आधारित था। खंडपीठ ने एकल जज की ओर से 29 अगस्त 20224 को पारित फैसले के संचालन पर अपील की लंबित अवधि तक रोक लगा दी है। खंडपीठ ने राज्य सरकार की ओर से अपील दायर करने में 56 दिनों की देरी को माफ कर दिया है।

अदालत ने यह फैसला सरकार बनाम देवेंद्र कुमार मामले में दिया। अपीलकर्ता राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि देवेंद्र (याचिकाकर्ता) को 29 सितंबर 2012 को संविदा के आधार पर लेक्चरर (इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग) के पद पर नियुक्त किया गया था। उनकी सेवाएं 2 जून 2017 को नियमित हुईं। प्रतिवादी को 19 जुलाई 2022 को सीनियर लेक्चरर के पद पर पदोन्नत किया गया था, जो उनके नियमितीकरण आदेश के आधार पर दी गई वरिष्ठता के अनुसार था।सरकार का तर्क है कि देवेंद्र ने 2024 में याचिका दायर करने से पहले वरिष्ठता को लेकर कोई आपत्ति नहीं उठाई थी। उनकी याचिका 6 दिसंबर 2023 को दिए गए एक अभ्यावेदन पर आधारित थी, जिसे राज्य ने अनुचित ठहराया है। राज्य की ओर से पेश हुए महाधिवक्ता अनूप रतन ने तर्क दिया कि पदोन्नति और वरिष्ठता के मुद्दों को जल्द उठाया जाना चाहिए। प्रतिवादी ने अपने अधिकारों को लेकर काफी देरी से कार्यवाही की।


Post a Comment

0 Comments

अनुबंध सेवा को वरिष्ठता में शामिल करने वाले फैसले पर लगी रोक