पुरानी गाड़ियों की खरीद–फरोख्त जांच के घेरे में, बिलासपुर आरटीओ से मांगा गया रिकॉर्ड
बिलासपुर,ब्यूरो रिपोर्ट
प्रदेश सरकार ने सोलन और बिलासपुर में वाहनों के फर्जी पंजीकरण और सत्यापन के मामले में एसडीएम से रिकॉर्ड मांगा है। स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (एसटीए) ने पिछले दो वर्षों में पंजीकृत सेकंड हैंड कार की रिपोर्ट मांगी है। परिवहन विभाग को शक है कि वाहनों के फर्जी पंजीकरण का खेल अन्य जिलों में भी हो सकता है।
प्रदेश सरकार ने भी इस मामले में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इस मामले की जांच करने के लिए राज्य ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी ने तीन सदस्यीय कमेटी बनाई है। प्रदेश सरकार ने सोलन और बिलासपुर में वाहनों के फर्जी पंजीकरण और सत्यापन के मामले में एसडीएम से रिकॉर्ड मांगा है। स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (एसटीए) ने पिछले दो वर्षों में पंजीकृत सेकंड हैंड कार की रिपोर्ट मांगी है। परिवहन विभाग को शक है कि वाहनों के फर्जी पंजीकरण का खेल अन्य जिलों में भी हो सकता है। प्रदेश सरकार ने भी इस मामले में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इस मामले की जांच करने के लिए राज्य ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी ने तीन सदस्यीय कमेटी बनाई है। यह कमेटी मामले को देख रही है।
परीक्षण में पता चला कि दिल्ली और अन्य राज्यों से चोरी की गई गाड़ियों को फर्स्ट हैंड दिखाकर बिलासपुर आरएलए में पंजीकृत किया जा रहा था। क्राइम ब्रांच ने संदिग्ध वाहनों के वैध दस्तावेजों और रिकॉर्डों को देने में असफल रहा। इसके बाद उसे पकड़ लिया गया। कर्मचारी पहले आरएलए शाखा में डीलिंग हैंड था। आरोप है कि इसी दौरान उसने नियमों की अनदेखी करते हुए चोरी की गाड़ियों के चेसिस नंबर और दस्तावेजों में हेरफेर की।सोलन में भी फर्जी वाहन सत्यापन के मामले सामने आए हैं। RLA की शिकायत पर भी पुलिस ने मामला दर्ज किया है। कोई शातिर व्यक्ति खुद वाहनों की जांच कर रहा था और आरएलए के एक लिपिक की ई वाहन पोर्टल की लॉगइन आईडी को बाहर से एक्सेस किया जा रहा था। स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (एसटीए) के नरेश ठाकुर ने बताया कि बिलासपुर एसडीएम से पिछले दो साल में हुए सेकंड हैंड गाड़ियों के पंजीकरण का रिकार्ड मांगा गया है।
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