बेटे की एक कॉल के इंतजार में परिजन, बढ़ती जा रही बेचैनी
काँगड़ा,ब्यूरो रिपोर्ट
घर के आंगन में जब भी किसी मोबाइल फोन की रिंगटोन गूंज रही है तो पूरा परिवार एक झटके में उस ओर दौड़ पड़ता है कि शायद सात समंदर पार फंसे बेटे रक्षित का फोन होगा। लेकिन स्क्रीन पर किसी और का नाम देख परिजनों के चेहरे पर फिर से मायूसी की लकीरें खिंच जाती हैं।
अमेरिकी कब्जे वाले रूसी तेल टैंकर मैरिनेरा से तीन भारतीय नागरिकों की सुरक्षित रिहाई की चर्चाओं को दो दिन बीत चुके हैं, लेकिन नगर निगम पालमपुर के बिंद्रावन वार्ड के सिद्धपुर निवासी रक्षित चौहान अब भी अपनों की पहुंच से दूर है। मंगलवार को जब अमेरिका की ओर से जहाज में फेंस भारतीयों को छोड़े जाने की चर्चाएं शुरू हुईं तो पिता रणजीत चौहान और चाचा नरेंद्र चौहान की आंखों में चमक लौट आई थी।उन्हें लगा था कि बस कुछ ही घंटों में रक्षित की आवाज सुनाई देगी। लेकिन बुधवार ढलने तक भी जब कोई संपर्क नहीं हुआ तो यह इंतजार अब उनके लिए और बढ़ गया है।
घर का हर सदस्य बस एक बार रक्षित की हेलो सुनने को बेताब है, ताकि यह यकीन हो सके कि उनका लाडला वाकई सुरक्षित है।भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष त्रिलोक कपूर ने कहा कि वह इस मामले में केंद्रीय नेतृत्व, जेपी नड्डा और सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज के माध्यम से दिल्ली में निरंतर संपर्क में हैं। उन्होंने परिजनों को आश्वस्त किया कि जहाज की रिहाई की प्रक्रिया पूरी होते ही रक्षित से संपर्क स्थापित हो जाएगा। उन्होंने कहा कि हमारा बेटा जल्द ही अपने घर लौटेगा, बस कुछ औपचारिकताओं का इंतजार है।रक्षित के पिता रणजीत चौहान रुंधे गले से कहते हैं, रिहाई की बात तो सुन ली पर जब तक बेटे की आवाज कान में नहीं पड़ती, कलेजे को ठंडक नहीं मिलेगी। हम कल से फोन हाथ में लेकर बैठे हैं कि शायद अब घंटी बजेगी।

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