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नीरज भारती ने विक्रमादित्य सिंह के समर्थन में डाली पोस्ट

                   भेदभाव को बढ़ावा देती है इस तरह की टिप्पणी: आईएएस अधिकारी एसोसिएशन

शिमला,ब्यूरो रिपोर्ट 

कृषि मंत्री चंद्र कुमार के पुत्र पूर्व मुख्य संसदीय सचिव नीरज भारती ने भी विक्रमादित्य सिंह के बयान के समर्थन में पोस्ट की है। उन्होंने लिखा, 'बाहरी प्रदेश के कई आईएएस और आईपीएस अधिकारी ऐसे हैं, हिमाचल प्रदेश में जो मंत्रियों और विधायकों के फोन तक नहीं उठाते, फोन की स्क्रीन देख कर नाम पढ़कर फोन उल्टा रख देते हैं।' 

इससे पहले बुधवार को एक और पोस्ट में नीरज भारती ने लिखा था, 'सभी तो नहीं लेकिन 60-70 प्रतिशत बाहर के अधिकारी ऐसे हैं जिन्हें हिमाचल प्रदेश या हिमाचलियों के हितों से कोई सरोकार नहीं है, कांग्रेसियों को याद होगा जब विपक्ष में थे तो एक उच्च आईपीएस अधिकारी पर पुलिस भर्ती घोटाले का आरोप लगाया था, जब कभी भी कांग्रेस या कांग्रेस के फ्रंटल संगठन विधानसभा घेराव करते थे तो वही उच्च आईपीएस अधिकारी लाठीचार्ज भी करवाता था कांग्रेसियों पर, लेकिन कांग्रेस की सरकार बनने के बाद मजे से पूरा समय काट कर ठाठ से रिटायर हो कर गया..... पता नहीं सरकार बनने के बाद उस अधिकारी के खिलाफ किया गया कांग्रेसियों का विरोध प्रदर्शन कहां गया।'हिमाचल प्रदेश आईएएस अधिकारी एसोसिएशन ने मंत्री विक्रमादित्य की टिप्पणी पर गहरी चिंता जताते हुए इसे न केवल अनुचित बताया, बल्कि इससे प्रशासनिक निष्पक्षता और अधिकारियों के मनोबल को ठेस पहुंचने की आशंका भी जाहिर की है। 

एसोसिएशन ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि इस तरह की टिप्पणियां अधिकारियों के मूल राज्य के आधार पर भेदभाव को बढ़ावा देती हैं, जो सांविधानिक व्यवस्था की भावना के विपरीत है। एसोसिएशन ने कहा कि हिमाचल में कार्यरत सभी आईएएस अधिकारी, चाहे वे राज्य के मूल निवासी हों या अन्य राज्यों से, संविधान की ओर से गठित ऑल इंडिया सर्विसेज के सदस्य हैं। उनका प्रथम कर्तव्य जनता की निष्पक्ष सेवा करना, सरकार की नीतियों को ईमानदारी से लागू करना और कानून व्यवस्था सुनिश्चित करना है। एसोसिएशन ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि अधिकारियों की गरिमा, मनोबल और निष्पक्षता की रक्षा के लिए उचित कदम उठाया जाए। साथ ही उच्च स्तर से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि सार्वजनिक विमर्श नीतियों और परिणामों तक सीमित रहे न कि अधिकारियों की व्यक्तिगत या क्षेत्रीय पृष्ठभूमि पर केंद्रित हो। हिमाचल प्रदेश आईपीएस अधिकारी एसोसिएशन ने विक्रमादित्य सिंह के बयान को हिमाचली और गैर-हिमाचली अधिकारियों के बीच अवांछित विभाजन पैदा करने वाला करार दिया। एसोसिएशन ने कहा कि इस बयान से पुलिस अफसरों के मनोबल को नुकसान पहुंचा है। एसोसिएशन ने राज्य सरकार से इस पूरे मामले को गंभीरता से लेने और भविष्य में ऐसे बयान दोहराए न जाने की मांग की है। एसोसिएशन ने यह भी आग्रह किया है कि मंत्री के साथ किसी भी आईपीएस अधिकारी की तैनाती न की जाए। आईपीएस अधिकारियों ने कहा कि अखिल भारतीय सेवाएं संविधान की देन हैं, जिनका उद्देश्य राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना और देशभर में निष्पक्ष, पेशेवर व एकीकृत प्रशासन उपलब्ध कराना है। आईपीएस अधिकारी, चाहे वे किसी भी कैडर या राज्य से हों, हिमाचल की जनता की सेवा समान निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ करते हैं। एसोसिएशन ने कहा कि किसी भी अधिकारी की मंशा पर उसके मूल या जन्मस्थान के आधार पर सवाल उठाना गलत है। 


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