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हिमाचल हाईकोर्ट के फैसले को सुक्खू सरकार ने दी चुनौती

                                  हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची हिमाचल सरकार

शिमला,ब्यूरो रिपोर्ट 

हिमाचल प्रदेश में 30 अप्रैल से पहले पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव करवाने के हाईकोर्ट के आदेश को राज्य सरकार ने सुप्रीम चुनौती दी है। इसके लिए स्पेशल लीव पिटीशन दायर की गई है। उच्चतम न्यायालय में चुनौती देने के लिए राज्य सरकार ने दो मुख्य बिंदुओं को आधार बनाया है।

याचिका में पहला तर्क यह है कि हाईकोर्ट की खंडपीठ ने प्रदेश सरकार को पंचायत चुनाव रोस्टर जारी करने के लिए केवल चार दिन दिए हैं, जो तर्कसंगत नहीं है, जबकि एक अन्य खंडपीठ ने 2021 में मनीष धरमैक मामले में रोस्टर जारी करने के बाद आपत्तियां सुनने के लिए तीन महीने दिए थे। चुनाव समय पर करवाने को लेकर दायर याचिका की सुनवाई करने वाली खंडपीठ ने फैसले पर स्थिति स्पष्ट नहीं की। दूसरा तर्क डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट से संबंधित है। प्रदेश में एक्ट लागू होने पर क्या पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव कुछ समय के लिए टाल सकते हैं या नहीं। 

आग्रह किया है कि इस पर भी कानून की स्थिति स्पष्ट होनी जरूरी है, क्योंकि डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट केंद्र सरकार का है, जबकि पंचायती राज अधिनियम राज्यों का है। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के महाधिवक्ता अनूप रतन ने कहा कि पंचायत चुनाव टालने की सरकार की कोई मंशा नहीं है। रोस्टर जारी करने के बाद आपत्तियों को लेकर खंडपीठ की अलग-अलग राय सामने आई है। कानून की व्याख्या स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि 31 जनवरी को पंचायतों का कार्यकाल खत्म हो गया है। पंचायती राज एक्ट में कार्यकाल समाप्त होने के बाद 6 माह में चुनाव करवाना बताया गया है। 

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