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सीएम सुक्खू का बड़ा ऐलान- ओपीएस बंद नहीं होगी

                                     अपने संसाधनों से जनता के हितों की रक्षा करेगी सरकार: सुक्खू

शिमला,ब्यूरो रिपोर्ट 

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि केंद्र की ओर से राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) खत्म किए जाने बावजूद राज्य सरकार पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) समेत सभी प्रमुख कल्याणकारी योजनाएं जारी रखेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार अपने संसाधनों से जनता के अधिकारों और हितों की हर हाल में रक्षा करेगी। मंगलवार को नई दिल्ली रवाना होने से पहले पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर भाजपा सत्ता में होती तो ओपीएस को हटाकर यूनीफाइड पेंशन स्कीम (यूपीएस) लागू कर दी जाती, जिससे सरकारी कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा समाप्त हो जाती। उन्होंने कहा कि वित्तीय प्रबंधन भले ही वित्त विभाग देखता हो, लेकिन सरकार का मुख्य उद्देश्य संसाधनों को मजबूत करना और विकास को गति देना है।

 मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2018 से 2021 तक जयराम ठाकुर के नेतृत्व में भाजपा सरकार के कुप्रबंधन और फिजूलखर्ची के कारण आज प्रदेश की वित्तीय स्थिति कमजोर हुई है। मुख्यमंत्री ने नेता प्रतिपक्ष की ओर से भाजपा विधायकों को वित्तीय प्रस्तुति के लिए आमंत्रित न करने के आरोप को खारिज किया। उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं को व्यक्तिगत रूप से लिखित निमंत्रण भेजे गए थे, लेकिन उन्होंने जानबूझकर बैठक में शामिल न होने का फैसला किया।मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार को पांच वर्ष के कार्यकाल में 54,296 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) मिला था। यह राशि राज्य की कुल आय का 25 से 30 प्रतिशत थी। इसके अलावा पूर्व भाजपा सरकार को 16,000 करोड़ रुपये की जीएसटी क्षतिपूर्ति भी मिली थी। इसका इस्तेमाल राज्य की आर्थिक स्थिति सुधारने के बजाय मुफ्त योजनाओं और केंद्रीय नेतृत्व को खुश करने के लिए अनावश्यक कार्यक्रमों और संस्थानों को खोलने पर खर्च किया गया। सीएम सुक्खू ने कहा कि वर्तमान सरकार को पिछले तीन वर्षों में केवल 17,563 करोड़ रुपये आरडीजी में मिले हैं, जो भाजपा को मिली राशि से लगभग आधी है। 

14वें वित्त आयोग के तहत भाजपा सरकार को राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) के रूप में वर्ष 2018-19 में 8,449 करोड़ रुपये, 2019-20 में 8,271 करोड़ और 2020-21 में 8,062 करोड़ रुपये मिले।अंतरिम अनुदान के रूप में 11,431 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। 15वें वित्त आयोग के तहत 2021-22 में 7,834 करोड़ रुपये और 2022-23 में 10,249 करोड़ रुपये मिले। इस प्रकार भाजपा सरकार को कुल 54,296 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। इसके बावजूद भाजपा सरकार ने कर्मचारियों के बकाया भुगतान नहीं किए और न ही महंगाई भत्ता (डीए) जारी किया। वर्तमान कांग्रेस सरकार को 15वें वित्त आयोग के तहत 2023-24 में 8,058 करोड़ रुपये, 2024-25 में 6,258 करोड़ रुपये और 2025-26 में 3,257 करोड़ रुपये मिले। इस तरह कांग्रेस सरकार को कुल 17,563 करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए, जो भाजपा सरकार को मिले अनुदान की तुलना में लगभग आधे से भी कम हैं।मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में कोई बड़ा निवेश नहीं किया। अब वर्तमान सरकार इस कमी को पूरा कर रही है और अस्पतालों के आधुनिकीकरण के लिए 3,000 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। साथ ही जाइका फेज-2 के तहत 1,300 करोड़ रुपये स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने पर व्यय किए जा रहे हैं। वर्तमान सरकार ने दिसंबर 2022 में कार्यभार संभाला, तब राज्य भारी आर्थिक संकट में था। भाजपा शासन के अंत तक राज्य पर कुल कर्ज बढ़कर लगभग 76,185 करोड़ रुपये हो गया था, जिसमें पांच वर्षों में लगभग 28,000 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने बिना बजट प्रावधान के 10,000 करोड़ रुपये के वेतन संशोधन और डीए बकाया की घोषणा कर दी। भाजपा ने अपने अंतिम छह महीनों में 900 से अधिक संस्थान खोल दिए, जिससे हर साल लगभग 5,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा। आर्थिक संकट से बचने के लिए वर्तमान सरकार को इनमें से कई संस्थानों को बंद करना पड़ा।

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