महिलाओं की पहल से तैयार हो रहे प्राकृतिक रंग
शिमला, ब्यूरो रिपोर्ट
उत्साह और खुशी का प्रतीक होली का त्योहार करीब है। राजधानी के बनूटी क्षेत्र की डुढालटी पंचायत में महिला मंडल की सदस्य हर्बल रंग बना रही हैं। यह गुलाल गाजर, चुकंदर और पालक का इस्तेमाल कर बनाया जा रहा है। छह महिलाएं इन रंगों को तैयार कर पर्यावरण को बचाने का संदेश भी दे रही हैं। इसके साथ घर के पास रोजगार भी मिल गया है। बाजारों में मिलने वाले मिलावटी और केमिकल युक्त रंगों के बजाय, यह महिलाएं पूरी तरह से घरेलू तथा जैविक चीजों का उपयोग कर रंग बना रही हैं। महिलाएं लाल और गुलाबी रंग के चुकंदर के अर्क, नारंगी रंग की ताजी गाजर और हरे रंग के लिए पालक की पत्तियां इस्तेमाल कर रही हैं।
इन रंगों की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह त्वचा के लिए पूरी तरह सुरक्षित हैं। यह पहल सिर्फ त्योहार तक सीमित नहीं है बल्कि इन महिलाओं के लिए आर्थिक मजबूती का जरिया भी बन गया है। अब तक यह महिलाएं लगभग 80 किलो हर्बल रंग तैयार कर चुकी हैं। लोक चेतना मंच की मोबलाइजर निशा शर्मा ने बताया कि यह महिलाएं पूरी मेहनत के साथ यह रंग तैयार कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इनके सहयोग के लिए वह हर संभव प्रयास कर रही हैं।
महिला मंडल की सदस्य सुनीता, भुनेश्वरी, नीलम, शारदा, बिमला और वंदना शर्मा ने बताया कि रंग बनाने के लिए अरारोट में पालक का रस मिलाया जाता है। इसके बाद इसे धूप में सुखाया जाता है। इसके बाद इसे मिक्सर में मिक्स किया जाता है जिससे हरा रंग तैयार होता है। ऐसे ही गाजर और चुकंदर के रस को भी अरारोट में डालकर, सुखाने के बाद पीसा जाता है और इसे पीस कर नारंगी, लाल तथा गुलाबी रंग तैयार किया जाता है। इस तरह एक रंग बनाने में एक से दो दिन का समय लगता है। इन महिलाओं ने बताया कि यह रंग तैयार कर मांग के अनुसार रंग बेचे जाएंगे।
.jpg)
.jpg)
0 Comments