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शराब और सीमेंट पर सेस लगाने की भी एक सीमा

                                        सचिवालय में प्रस्तुति के बाद ओकओवर में फिर हुई चर्चा

शिमला,ब्यूरो रिपोर्ट 

हिमाचल में टैक्स लगाने के लिए शराब और सीमेंट जैसी वस्तुओं पर सेस लगाए जा रहे हैं, मगर इनकी भी एक सीमा है। अगर ज्यादा कर लगाएंगे तो फिर बाहरी राज्यों से शराब और सीमेंट मंगवाया जाता है। भू राजस्व पर सेस लगाकर राजस्व जुटाने की एक उम्मीद है।हिमाचल की वित्तीय स्थिति को लेकर सचिवालय में रविवार को प्रधान सचिव वित्त की ओर से दी गई प्रस्तुति के बाद शाम को ओक ओवर में आरडीजी पर चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री सुक्खू सहित मंत्री, विधायक और अधिकारी इस अवसर पर मौजूद रहें। हिमाचल की वित्तीय स्थिति को लेकर कइयों ने अपनी राय भी दी।स्क्रीन पर पीपीटी न चलने पर तल्ख हुए सीेएम स्क्रीन पर पीपीटी न चलने पर मुख्यमंत्री सुक्खू तल्ख हो गई। न्यू आर्म्सडेल भवन में जब प्रधान सचिव वित्त देवेश कुमार ने पीपीटी शुरू की तो स्क्रीन न चलने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि क्या इसे पहले चेक नहीं किया जाता है। सीएम ने कहा कि आईटी में इसके इंचार्ज कौन हैं। ये कौन सी तकनीक लगाई गई है, जिससे स्क्रीन नहीं चल रही।उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट के प्रभाव पर मंत्रिमंडल के समक्ष विस्तृत प्रस्तुति दी गई थी और इस पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। उन्होंने कहा कि वित्त विभाग ने स्थिति से निपटने के लिए केवल सुझाव प्रस्तुत किए हैं। इस पर अंतिम निर्णय मंत्रिमंडल की ओर से लिया जाएगा।उन्होंने प्रदेशवासियों को आश्वासन दिया कि लोगों के लिए कल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर लागू किया जाएगा।

 सरकार ने आम आदमी पर बोझ डाले बिना संसाधनों के सृजन की दिशा में नीतियां लागू की हैं। राज्य सरकार ने 16वें वित्त आयोग के समक्ष वन क्षेत्र का मामला उठाया, जिसे आयोग ने स्वीकार कर लिया है। इसके अतिरिक्त भूस्खलन से होने वाली आपदाओं के लिए भी धन आवंटन पर सहमति बनी है।उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट के प्रभाव पर मंत्रिमंडल के समक्ष विस्तृत प्रस्तुति दी गई थी और इस पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। उन्होंने कहा कि वित्त विभाग ने स्थिति से निपटने के लिए केवल सुझाव प्रस्तुत किए हैं। इस पर अंतिम निर्णय मंत्रिमंडल की ओर से लिया जाएगा।राज्य सचिवालय में प्रधान सचिव वित्त देवेश कुमार ने स्पष्ट किया कि किन कारणों को बताकर 16वें वित्त आयोग ने आरडीजी नहीं देने की संस्तुति की है। आयोग ने राजस्व घाटा घटने की बात कर आरडीजी बंद कर दी। आयोग की रिपोर्ट के अनुसार राजस्व घाटा 2020-21 में जीडीपी के 7.8 प्रतिशत से घटकर 2023-24 में 6.9 प्रतिशत आ गया, जो जीडीपी का लगभग 0.3 प्रतिशत घट गया है। प्रतिबद्ध व्यय  में भी कमी आई है।


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शराब और सीमेंट पर सेस लगाने की भी एक सीमा