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हिमाचल में दवा सैंपल फेल, विपक्ष का सरकार पर तीखा हमला

                                                दवाओं की गुणवत्ता पर सवाल, विपक्ष ने उठाई जांच की मांग

शिमला,ब्यूरो रिपोर्ट 

हिमाचल प्रदेश विधानसभा बजट सत्र में शनिवार को स्वास्थ्य विभाग की मांगों पर लाए कटौती प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा विधायकों ने दवाओं के सैंपल फेल होने का मामला उठाते हुए सरकार को घेरा। कांगड़ा के भाजपा विधायक पवन काजल ने सदन में  'हिमाचल में बनीं 71 दवाओं समेत देश भर में 215 के सैंपल हुए फेल' शीर्षक से छपी खबर को पढ़ा।

 शनिवार को सदन में पवन काजल ने कहा कि यह उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि दवाओं के सैंपल फेल होने पर उचित कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं।हिमाचल प्रदेश में सैंपल फेल होना कितनी शर्मिंदगी की बात है। सुलह के भाजपा विधायक विपिन सिंह परमार ने भी कहा कि जिन कंपनियों के दवा सैंपल फेल हो गए, उन पर क्या कार्रवाई हो रही है। वह यह नहीं कहते कि इसकी जांच के लिए जो लोग लगे हैं, वे सभी खराब हैं। उनका फेरबदल करें। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अगर दवाएं तैयार होती हैं तो 40 प्रतिशत हिमाचल में होती हैं। 1400 दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं। इस पर क्या कार्रवाई की गई है। 

जेनरिक दवाओं को आगे बढ़ाने के लिए ठोस रणनीति क्यों तैयार नहीं की जा रही हैं। बीबीएन में तैयार होने वाली दवाएं पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई हैं।परमार ने कहा कि मुख्यमंत्री बोले हैं कि सैंपलिंग के लिए लैब स्थापित करेंगे। कंडाघाट की लैब की हालत तो सुधारो। दवा ही मिलावट वाली होगी तो आम आदमी का इलाज कैसे होगा। वहीं पवन काजल ने कहा कि टांडा मेडिकल कॉलेज में सीटी स्कैन करवाने जाएं तो दो महीने की वेटिंग होती है। टांडा कॉलेज में मरीज फर्श पर लेटने को मजबूर हो जाते हैं। वार्ड बॉय को वेतन नहीं मिल रहा। पार्किंग की कोई सुविधा नहीं। टांडा मेडिकल कॉलेज से हजारों की संख्या में मरीज ठीक होकर गए हैं। काजल ने कहा कि विधायक निधि में सीधी कटौती उचित नहीं है। वह इस निधि से भी कई उपकरणों को खरीदने का विचार कर रहे थे।



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