अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे शिक्षकों को उचित स्थान पर तैनाती देना प्रशासन का दायित्व
शिमला,ब्यूरो रिपोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई कर्मचारी कठिन या जनजातीय क्षेत्र में अपना निर्धारित कार्यकाल पूरा कर लेता है, तो उसे वहां से स्थानांतरित करना सरकार की जिम्मेदारी है। कोर्ट ने कहा कि यदि ऐसा नहीं किया जाता, तो इन क्षेत्रों में नियुक्ति को सजा के रूप में देखा जाने लगेगा।न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने कहा है कि यदि कर्मचारियों को यह भरोसा नहीं होगा कि कार्यकाल पूरा होने के बाद उनका तबादला कर दिया जाएगा, तो कठिन क्षेत्रों में कोई भी स्वेच्छा से सेवा नहीं देना चाहेगा।
समय पर स्थानांतरण न होने से इन क्षेत्रों में नियुक्तियों को पनिशमेंट पोस्टिंग माना जाने लगेगा। कठिन क्षेत्रों में कार्यकाल पूरा करने वाले शिक्षकों का स्थानांतरण सजा नहीं, बल्कि अधिकार है। न्यायालय ने 31 जनवरी के आदेश को रद्द करते हुए प्रतिवादी शिक्षा विभाग और सरकार को निर्देश दिया है कि चार सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता को उनके वर्तमान स्थान से स्थानांतरित कर किसी अन्य क्षेत्र में तैनात किया जाए और उनकी जगह किसी नए व्यक्ति की नियुक्ति की जाए। वहीं अदालत में राज्य सरकार ने दलील दी कि याचिकाकर्ता का तबादला इसलिए नहीं किया गया क्योंकि इससे उनके बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती थी। हालांकि, अदालत ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि विभाग का यह रवैया मनमाना है। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शारीरिक शिक्षा प्रवक्ताओं (डीपीई) की वरिष्ठता और पदोन्नति से जुड़े मामले में कड़ा रुख अपनाया है।मामले की सुनवाई करते हुए न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने शिक्षा विभाग को आदेश दिया है कि याचिकाकर्ता प्रवक्ताओं की वरिष्ठता, जैसा कि विभाग की ओर से निर्धारित की गई है, उसे अगली सुनवाई पर आधिकारिक रिकॉर्ड में प्रस्तुत किया जाए।
इस मामले की अगली सुनवाई 25 मार्च को होगी। इस मामले को लेकर डीपीई संघ की ओर से एग्जीक्यूशन पिटिशन दायर की गई है।संघ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को पिछली सुनवाई के दौरान अवगत कराया था कि सरकार ने कोर्ट के आदेशानुसार भर्ती एवं पदोन्नति नियम तो बना दिए हैं और डीपीई को लेक्चरर का पदनाम भी दे दिया है।लेकिन, वर्तमान में जो वरिष्ठता सूची तैयार की गई है,वह केवल डीपीई कैडर के भीतर ही सीमित है।याचिकाकर्ताओं को डर है कि जब आगे पदोन्नति (प्रमोशन) की बारी आएगी, तो लेक्चरर की समेकित (कंसोलिडेटेड) वरिष्ठता सूची में शामिल न होने से उनकी अनदेखी की जा सकती है। राज्य सरकार ने तर्क दिया था कि अदालत के फैसले का पालन किया गया है। उन्होंने आश्वस्त किया कि इन शिक्षकों की वरिष्ठता निर्धारित हो चुकी है और पदोन्नति के समय इन्हें समेकित सूची के अनुसार ही विचार में लिया जाएगा।याचिकाकर्ता शिक्षक जो कि वर्तमान में मंडी जिले के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला कठोग में तैनात हैं। उन्होंने अपनी याचिका में बताया कि उन्होंने इस कठिन क्षेत्र में अपना सामान्य कार्यकाल पूरा कर लिया है, फिर भी विभाग ने 31 जनवरी 2026 को एक आदेश जारी कर उनके तबादले के अनुरोध को खारिज कर दिया था। याची ने इसी आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिस पर अदालत में यह फैसला दिया है।


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