अब नियम और भी सख्त होते नजर आ रहे हैं
शिमला,ब्यूरो रिपोर्ट
हिमाचल प्रदेश में इस बार की जनगणना न केवल आबादी के आंकड़े जुटाएगी, बल्कि प्रदेश की बदलती जीवनशैली और खान-पान का डिजिटल खाका भी तैयार करेगी। आगामी जनगणना 2027 के पहले चरण (मकान सूचीकरण) के तहत पहली बार प्रदेश के नागरिकों से उनकी डिजिटल सुविधाओं जैसे स्मार्टफोन, इंटरनेट, कम्प्यूटर और लैपटॉप के बारे में विस्तार से जानकारी मांगी जाएगी। इतना ही नहीं, सामाजिक-आर्थिक स्थिति का सटीक आकलन करने के लिए परिवार द्वारा उपभोग किए जाने वाले मुख्य अनाज का विवरण भी सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज होगा।
कांगड़ा जिला सहित पूरे प्रदेश में इस महत्त्वपूर्ण प्रक्रिया का पहला चरण 12 मई से शुरू होकर दस जून तक संचालित किया जाएगा।जनगणना की इस व्यापक प्रक्रिया को दो मुख्य चरणों में विभाजित किया गया है। प्रथम चरण में मकानों की सूची तैयार करना और बुनियादी सुविधाओं का आकलन करना मुख्य लक्ष्य रहेगा। इसके बाद दूसरे चरण में जनसंख्या की वास्तविक गणना की जाएगी। कर्मचारियों को विशेष रूप से डिजिटल डेटा संग्रह के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है, जिससे डेटा में मानवीय त्रुटि की गुंजाइश कम रहे और रिपोर्ट पारदर्शी हो। पहले चरण के दौरान गणना कर्मचारी परिवारों से मकान की स्थिति से जुड़े सवाल पूछेंगे। इसमें भवन का नंबर, फर्श, दीवार और छत में इस्तेमाल की गई सामग्री, और कमरों की संख्या जैसे विवरण शामिल होंगे। इसके अतिरिक्त, परिवार के पास उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं जैसे पेयजल का स्रोत, बिजली की उपलब्धता, शौचालय का प्रकार, गंदे पानी की निकासी और रसोई में इस्तेमाल होने वाले ईंधन (एलपीजी/ पीएनजी) की जानकारी भी जुटाई जाएगी।तकनीक के इस दौर में जनता को 27 अप्रैल से 11 मई तक स्वयं गणना की सुविधा भी दी जाएगी।
इसके माध्यम से लोग ऑनलाइन पोर्टल पर अपनी और अपने परिवार की जानकारी स्वयं भर सकेंगे। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि इस प्रक्रिया में लिया गया सभी डेटा पूरी तरह गोपनीय रहेगा और इसका उपयोग केवल सांख्यिकीय उद्देश्यों और कल्याणकारी योजनाओं के निर्माण के लिए किया जाएगा।जीवन स्तर को समझने के लिए सरकार इस बार घरेलू संपत्तियों का विस्तृत विवरण भी ले रही है। सर्वे के दौरान परिवारों से उनके पास उपलब्ध रेडियो, टेलीविजन, साइकिल, स्कूटर, मोटरसाइकिल, कार, जीप या वैन जैसे साधनों की जानकारी पूछी जाएगी। डिजिटल सुविधाओं पर विशेष जोर देने का उद्देश्य यह समझना है कि प्रदेश में डिजिटल पहुंच का स्तर क्या है और भविष्य की ई-गवर्नेंस योजनाओं को कैसे बेहतर बनाया जा सकता है।कांगड़ा के उपायुक्त हेमराज बैरवा ने बताया कि जनगणना के लिए कर्मचारियों की ट्रेनिंग शुरू कर दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस डिजिटल प्रक्रिया से प्रदेश की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का जो सटीक डेटा प्राप्त होगा, वह सरकार को भविष्य की योजनाओं को अधिक प्रभावी और लक्षित ढंग से तैयार करने में मदद करेगा।


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