सच्चे मन से मांगी हर मुराद होती है पूरी
चम्बा,ब्यूरो रिपोर्ट
जिला में स्थित भलेई माता मंदिर भक्तों की अटूट आस्था का केंद्र है। प्रमुख मान्यता है कि मां भद्रकाली भलेई की स्वयंभू प्रकट काले रंग की पत्थर की चतुर्भुजा प्रतिमा पर जब पसीना आता है तो यह संकेत होता है कि मांगी गई मन्नत अवश्य पूरी होगी।

इसलिए मंदिर में पहुंचने वाले भक्त मन्नत मांगने के बाद मन्नत पूरी होने का संकेत लेने के लिए हाथ जोड़े मां भलेई के गर्भ गृह के बाहर बैठ इंतजार करते हैं। इन दिनों मंदिर में दिनभर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है।बच्चों के मुंडन के लिए कई बार तो श्रद्धालुओं को सुबह से दोपहर तक अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। सोमवार को भी करीब 3000 श्रद्धालु मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे। भलेई के मंदिर का लगभग 650 वर्ष पुराना इतिहास है। मंदिर के गर्भ गृह में मां भलेई की प्रतिमा भलेई गांव के समीप भ्राण नामक स्थान पर एक बावड़ी में प्रकट हुई थी। कहा जाता है कि वर्ष 1569 में चम्बा रियासत के तत्कालीन राजा प्रताप सिंह को माता भलेई ने स्वप्न में दर्शन देकर बताया था कि भ्राण में एक बावड़ी में है और राजा तुम भ्राण आकर मुझे चम्बा ले जाओ।
मां भलेई के आदेश पर राजा प्रताप सिंह विद्वान ब्राह्मणों के साथ भ्राण पहुंचे, जहां की माता द्वारा स्वप्न में बताए गए अनुसार बावड़ी में माता भलेई की 2 फुट ऊंची काले रंग की प्रतिमा के साथ धन के तीन चरूए मिले। पूर्ण विधि-विधान से माता भद्रकाली भलेई की मूर्ति को सुंदर पालकी में विराजमान करवाकर चम्बा की ओर प्रस्थान किया गया, जिसके बाद यहां लोगों की श्रद्धा लगातार बढ़ती गई। भलेई मंदिर के पंडित लोकीनंद शर्मा ने बताया कि मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए पूरी व्यवस्था की गई है।प्राचीन व ऐतिहासिक मूर्ति को चोरों ने भी एक बार चोरी करने का असफल प्रयास किया था। वर्ष 1973 में तो चोर मंदिर से मां भलेई की मूर्ति को चुरा ले गए थे, परंतु जब चोर भलेई से कुछ किलोमीटर दूर चौहड़ा नामक स्थान पर पहुंचे तो वहां पुल पार कर दरिया की दूसरी ओर वह जा ही नहीं पाए। चोर जब मां की मूर्ति को उठाकर पुल के दूसरी ओर देखने का प्रयास करते तो उन्हें अंधेरा ही दिखता और जब पीछे देखते तो उन्हें सब कुछ दिखाई देता। मां के इस चमत्कार से घबराकर चोर चौहड़ा में ही मां की मूर्ति को छोड़कर भाग गए थे।

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