विश्व प्रसिद्ध राउलाने उत्सव संपन्न
किन्नौर,ब्यूरो रिपोर्ट
जिला किन्नौर के ऐतिहासिक गांव कल्पा में पांच दिन तक विश्व प्रसिद्ध राउलाने उत्सव मनाया गया। मंगलवार को पारंपरिक रीति-रिवाज और पूजा-अर्चना के साथ उत्सव का समापन हो गया। अंतिम दिन बड़ी संख्या में लोग उमड़े। इसमें स्थानीय लोगों के साथ देश-विदेश से पर्यटक भी शामिल हुए।
विदेशी पर्यटकों ने भारतीय संस्कृति की इस अनूठी झलक को अपने कैमरों में कैद किया।उत्सव के अंतिम दिन पुंदलूओं ने विधिवत पूजा-पाठ संपन्न किया। मान्यता है कि सस्कर त्योहार के दौरान ऊंचाई वाले क्षेत्रों से आए ''सावनी'' को प्रसन्न होकर विदा करना अनिवार्य है, ताकि पूरे वर्ष गांव में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहे। इसी उद्देश्य से पांच दिन तक देव नृत्य और अनुष्ठानों का दौर चला। उत्सव की सबसे खास बात इसकी विशिष्टता रही, जिसमें केवल पुरुषों ने ही भाग लिया। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप पर किन्नौरी वेशभूषा में सजे पुरुषों ने जब राउला, राउलाने और पुंदलू नृत्य पेश किया, तो पूरा कल्पा गांव लोक धुनों से सराबोर हो उठा।
स्थानीय ग्रामीण जय प्रभा समेत अन्य ग्रामीणों ने बताया कि इस साल यह उत्सव जिला या राज्य तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय प्रचार के चलते वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाने में सफल रहा।मंदिर कमेटी के सेक्रेटरी शिवदयाल नेगी ने कहा कि यह रौलाने मेला सदियों से मनाया जा रहा है। यह पहाड़ की परियों को खुश करने के लिए पांच दिन का सेलिब्रेशन है। मेले के दौरान आस-पास के गांवों से लोग घूमने आते हैं, और सभी को एक साथ आने का मौका मिलता है। यहां बहुत सारे टूरिस्ट आते हैं, और हम भविष्य में इसे और अच्छे तरीके से मनाने की कोशिश करेंगे।


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