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उद्योगों पर 16.5% से अधिक बिजली शुल्क वसूली पर हाईकोर्ट की रोक

                            बिजली दरों पर राहत: हाईकोर्ट ने उद्योगों से अतिरिक्त शुल्क वसूली रोकी

शिमला,ब्यूरो रिपोर्ट 

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य के मध्यम और बड़े उद्योगों को बड़ी राहत देते हुए सरकार की ओर से बढ़ाए गए बिजली शुल्क की वसूली पर फिलहाल रोक लगा दी है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार इन श्रेणियों के उपभोक्ताओं से 16.5 फीसदी से अधिक बिजली शुल्क नहीं वसूल सकेगी। 

याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि वर्ष 2017 में बिजली शुल्क की दर 11 फीसदी तय की गई थी। सितंबर 2023 में बढ़ाकर 25 फीसदी कर दिया गया। जनवरी 2024 में एक और अधिसूचना जारी कर इसे 37.50 फीसदी तक पहुंचा दिया गया। अदालत ने प्रतिवादी उत्तरदाताओं को चार सप्ताह में अपना जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 23 अप्रैल को होगी।न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने माना कि शुल्क में यह भारी बढ़ोतरी हिमाचल प्रदेश बिजली (शुल्क) अधिनियम, 2009 की धारा 11(2) के खिलाफ है। 

अधिनियम की धारा 11(2) के तहत राज्य सरकार बिजली शुल्क की दरों में संशोधन तो कर सकती है, लेकिन एक बार में यह वृद्धि पहले से निर्धारित दरों के 50 फीसदी से अधिक नहीं होनी चाहिए। चूंकि, 11 फीसदी का 50 फीसदी अधिकतम 5.5 फीसदी होता है, इसलिए कुल शुल्क 16.5 फीसदी से ज्यादा नहीं होना चाहिए था। सरकार की ओर से इसे सीधे 25 और फिर 37.50 फीसदी करना कानूनन गलत प्रतीत होता है। बता दें, बिजली शुल्क बढ़ोतरी के खिलाफ हाईकोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गई हैं। इससे पहले भी कोर्ट याचिकाओं पर अलग-अलग सुनवाई करते हुए अपना फैसला सुना चुका है। 23 अप्रैल को हाईकोर्ट सभी लंबित याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करेगा।


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