शराब ठेके बंद होने से उपभोक्ता परेशान, विभाग की कार्रवाई तेज
शिमला,ब्यूरो रिपोर्ट
हिमाचल प्रदेश में आबकारी विभाग की ओर से वर्ष 2026-27 के लिए की जा रही शराब ठेकों की नीलामी प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद कई क्षेत्रों में ठेके अब भी आवंटन से बाहर हैं। जिला शिमला के 80 और मंडी जिले के 20 शराब ठेकों पर अभी भी ताले लटके हुए हैं। कारोबारी इन ठेकों को लेने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे, जिससे विभाग के सामने चुनौती खड़ी हो गई है।
प्रदेश में कुल 2125 शराब ठेकों में से 2018 ठेकों की ऑनलाइन नीलामी पूरी कर ली गई है। इस तरह विभाग ने करीब 95 फीसदी लक्ष्य हासिल कर लिया है, लेकिन शेष ठेकों के लिए बार-बार निविदाएं आमंत्रित करने के बावजूद अपेक्षित परिणाम नहीं मिल रहा। इस बार सरकार ने बीते वर्ष के मुकाबले ठेकों के बेस प्राइस में करीब 10 फीसदी की बढ़ोतरी की है। यही वजह मानी जा रही है कि खासकर शिमला और मंडी जैसे क्षेत्रों में कारोबारी पीछे हट रहे हैं।स्थानीय कारोबारियों का कहना है कि बढ़ी हुई कीमतों के साथ बिक्री का अनुपात संतुलित नहीं बैठ रहा, जिससे मुनाफे की गुंजाइश कम हो गई है। वहीं, कुल्लू और लाहौल-स्पीति जिलों में स्थिति इससे अलग रही। इन दोनों जिलों के सभी शराब ठेकों को तेलंगाना की एक कंपनी ने अपने नाम कर लिया है। इससे साफ है कि जहां स्थानीय कारोबारी हिचकिचा रहे हैं, वहीं बाहरी कंपनियां काम लेने को तैयार हैं। आबकारी विभाग शेष बचे ठेकों के लिए रोजाना ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित कर रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इन ठेकों का भी आवंटन कर दिया जाएगा। फिलहाल विभाग की नजर शेष 105 ठेकों के जल्द आवंटन पर टिकी है, ताकि नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ ही पूरी व्यवस्था पटरी पर लाई जा सके।सरकार ने इस वर्ष शराब ठेकों की ऑनलाइन नीलामी से करीब 2900 करोड़ रुपये के राजस्व प्राप्ति का लक्ष्य रखा है। बीते वित्तीय वर्ष में करीब 2800 करोड़ रुपये का सरकार को राजस्व प्राप्त हुआ था।इस बार कर एवं आबकारी विभाग ने बीते वर्ष की तरह पुराने ठेकेदारों को ही कुछ दिन अतिरिक्त काम नहीं देने का फैसला नहीं लिया है। सरकारी उपक्रमों को भी इस बार शराब ठेके चलाने को नहीं दिए जा रहे हैं।

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