गहन जांच और नेटवर्क ट्रैकिंग से पुलिस की बड़ी सफलता, सप्लाई चेन तक पहुंचकर तोड़ा नशा कारोबार
शिमला,रिपोर्ट नवीन शर्मा
नशा तस्करी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत दर्ज मामलों की जांच में गुणवत्ता सुधार और गहन अन्वेषण अपनाते हुए शिमला पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस द्वारा अपनाई गई “बैकवर्ड लिंकिज” आधारित जांच प्रणाली के चलते नशा तस्करों के बड़े नेटवर्कों को ध्वस्त करने में उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की गई है, जो नशा उन्मूलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
इस रणनीति के तहत आरोपियों की गहन जांच कर उनके पीछे सक्रिय सप्लायरों और संगठित गिरोहों तक पहुंच बनाते हुए बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां की गई हैं।वर्ष 2026 के मात्र साढ़े तीन महीनों में ही बैकवर्ड लिंकिज के आधार पर कुल 27 आरोपियों की गिरफ्तारी की गई है, जो पिछले पांच वर्षों की तुलना में सर्वाधिक है। यह दर्शाता है कि पुलिस अब केवल छोटे तस्करों तक सीमित न रहकर पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचकर कार्रवाई कर रही है। तुलनात्मक रूप से वर्ष 2024 में इसी अवधि में केवल 4 और वर्ष 2025 में 9 आरोपियों की गिरफ्तारी इस आधार पर हुई थी, जबकि वर्ष 2026 में यह संख्या तीन गुना से अधिक और 2024 की तुलना में लगभग सात गुना तक पहुंच गई है।इसके साथ ही वर्ष 2026 में 19 नशा तस्करी नेटवर्कों को सफलतापूर्वक ध्वस्त किया गया है, जो हिमाचल में नशे की आपूर्ति से जुड़े थे। ये नेटवर्क नेपाल सहित पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, केरल और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से संचालित हो रहे थे। इसके विपरीत वर्ष 2025 में केवल 4 और वर्ष 2024 में मात्र 1 नेटवर्क के विरुद्ध कार्रवाई की गई थी, जिससे 2026 की कार्यवाही को अब तक की सबसे प्रभावी और व्यापक कार्रवाई माना जा रहा है।
इस दौरान कई बड़े मामलों का भी खुलासा हुआ, जिनमें लगभग एक करोड़ रुपये मूल्य की कमर्शियल मात्रा में LSD की बरामदगी और सात आरोपियों की गिरफ्तारी शामिल है, जिनमें चार पुलिसकर्मी भी पाए गए। अंबाला से संचालित चिट्टा तस्करी नेटवर्क से 288 ग्राम चिट्टा बरामद किया गया, नेपाल से लाई गई 11.5 किलो अफीम की खेप के साथ चार आरोपियों की गिरफ्तारी और 12 लाख रुपये नकद की बरामदगी की गई। इसके अलावा शाही महात्मा गैंग के मुख्य सरगना की गिरफ्तारी, भारत-नेपाल सीमा से तस्करों की धरपकड़, पंजाब और हरियाणा से वांछित आरोपी लूकस और डेविड की गिरफ्तारी तथा 83 ग्राम चिट्टा मामले में 8 आरोपियों की गिरफ्तारी जैसी महत्वपूर्ण कार्रवाइयां भी शामिल हैं।पुलिस के अनुसार इन कार्रवाइयों से न केवल सप्लाई चेन को तोड़ा गया है, बल्कि नशा माफिया के वित्तीय और संगठनात्मक ढांचे को भी गहरी चोट पहुंची है। इससे हजारों युवाओं तक नशे की पहुंच को रोकने में मदद मिली है। शिमला पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इस तरह की सख्त और वैज्ञानिक जांच प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी, ताकि नशा तस्करी के नेटवर्क को पूरी तरह समाप्त किया जा सके और समाज को नशामुक्त दिशा में आगे बढ़ाया जा सके।


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