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हिमाचल: भूकंप का बढ़ा खतरा, कांगड़ा जिला सिस्मिक जोन-6 में शामिल; 1905 की तबाही की यादें ताजा

                               संवेदनशील क्षेत्र घोषित होने के बाद भूकंपरोधी निर्माण और सतर्कता पर जोर

धर्मशाला, ब्यूरो रिपोर्ट 

हिमाचल प्रदेश का कांगड़ा जिला अब सिस्मिक जोन-6 में पहुंच गया है, जो मौजूदा जोन-5 से भी अधिक खतरनाक है। इन सब का कारण हमारी अपनी गलतियां हैं, जिन्हें हम सुधारने के बजाए बार-बार दोहराए जा रहे हैं। यह बात विख्यात भू-विज्ञानी और पद्मश्री डॉ. हर्ष गुप्ता ने होराइजन्स : टेक्टोनिक्स, सस्टेनेबिलिटी और रेजिलियंस पर शुरू हुई तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान कही। धर्मशाला में शनिवार को शुरू हुई कार्यशाला में देश-विदेश के वैज्ञानिक भाग ले रहे हैं। 

डॉ. गुप्ता ने बताया कि हिमालयी क्षेत्रों में तेजी से पिघल रहे ग्लेशियर भूकंपीय गतिविधियों को प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ग्लेशियर के पिघलने से धरती के भीतर दबाव का संतुलन बिगड़ रहा है, जिससे भूकंप की संभावना बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि कांगड़ा क्षेत्र पहले से ही भूकंप के लिहाज से संवेदनशील रहा है। यहां 1905 का विनाशकारी भूकंप इसका बड़ा उदाहरण है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी इस क्षेत्र में बड़े भूकंप की आशंका बनी हुई है। इस दौरान उन्होंने हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते पर्यावरणीय बदलाव और भूकंपीय जोखिम को लेकर चिंता जताई। 

डॉ. हर्ष गुप्ता ने कहा कि हम अपनी मौत की रिश्वत खुद ही दे रहे हैं। जब भी हम अपने घरों और भवनों को बनाते हैं तो उन्हें नियमों के तहत बनाने के बजाय रिश्वत देकर उन्हें टाल देते हैं। उन्होंने कहा कि मैक्लोडगंज और शिमला में कई बहुमंजिला भवन लटके हुए हैं, जिन्हें नियमों के तहत बनाया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि आज हम तकनीकों को विकसित कर रहे हैं। लेकिन तकनीक हमारे लिए ही घातक हो रही है। आज लोग कंप्यूटर और मोबाइल फोन पर टाइप तो कर रहे हैं, लेकिन वह लिखना भूल रहे हैं।


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