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हिमाचल में नवाचार: मशरूम अपशिष्ट से बनेंगे घरों के ब्लॉक

                                                     खुंब निदेशालय ने शुरू किया प्रयोग

सोलन, ब्यूरो रिपोर्ट

मशरूम उत्पादन के बाद बचने वाली खाद के अपशिष्ट का इस्तेमाल अब घर बनाने के लिए किया जाएगा। वैज्ञानिकों ने ऐसी तकनीक पर काम शुरू किया है, जिससे मशरूम खाद के अवशेषों से बिल्डिंग ब्लॉक तैयार किए जाएंगे। यह न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम है, बल्कि गृह निर्माण के क्षेत्र में भी क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है। 


डीएमआर सोलन ने इस पर का शुरू कर दिया है। इन ब्लॉक्स की सबसे बड़ी खासियत इनका थर्मल इंसुलेशन है। वैज्ञानिकों के अनुसार इन अवशेषों से बने ब्लॉक से तैयार घर प्राकृतिक रूप से तापमान को नियंत्रित रखेंगे। ये ब्लॉक सर्दियों के मौसम में घर के अंदर की गर्मी को बाहर नहीं जाने देंगे और गर्मियों में तपिश से राहत दिलाएंगे। इन्हें मुख्य रूप से घरों के अंदर पार्टिशन के काम में लाया जा सकेगा। वर्तमान में मशरूम खाद के अपशिष्ट को ठिकाने लगाना उत्पादकों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

भारी मात्रा में निकलने वाले इस कचरे के कारण प्रदूषण की समस्या भी पैदा हो रही थी। अब इस नई तकनीक से कचरे का सदुपयोग होगा और किसानों व उद्यमियों को इसका आर्थिक लाभ भी मिल सकेगा। वैज्ञानिकों ने इस पर काम शुरू कर दिया है और उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही ये ब्लॉक बाजार में उपलब्ध होंगे।  यह पहल न केवल निर्माण लागत को कम करने में सहायक होगी, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल घरों के निर्माण को भी बढ़ावा देगी।

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