पूर्व राज्यसभा सांसद ने संगठन में महिलाओं की भागीदारी पर उठाए गंभीर मुद्दे
धर्मशाला, ब्यूरो रिपोर्ट
कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद विप्लव ठाकुर ने संगठन में महिलाओं की उपेक्षा पर कड़ा एतराज जताया है। हाल ही में प्रदेश में हुई 71 ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्षों की नियुक्तियों में एक भी महिला को स्थान न मिलने पर उन्होंने नेतृत्व की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
विप्लव ने कहा कि एक तरफ लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने की बातें हो रही हैं और पंचायती राज संस्थाओं में पहले से 50 फीसदी आरक्षण लागू है। ऐसे में देश के सबसे पुराने राजनीतिक दल (कांग्रेस) में महिलाओं की ऐसी अनदेखी समझ से परे है। उन्होंने प्रदेश कांग्रेस प्रभारी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें इस विषय पर ध्यान देना चाहिए था, लेकिन वह शिमला से बाहर अन्य जिलों का रुख ही नहीं करना चाहतीं।
हाईकमान को इस तरह के फैसलों पर गंभीरता से पुनर्विचार करना चाहिए। महिलाओं की पूर्ण रूप से अनदेखी न केवल पार्टी के भीतर असंतोष पैदा कर सकती है, बल्कि महिला वोट बैंक के बीच भी गलत संदेश भेज सकती है।
विप्लव ने आरोप लगाया कि अब कांग्रेस में नियुक्तियां जमीनी स्तर के बजाय सीधे ‘ऊपर’ से हो रही हैं। उन्होंने संगठन के उन दावों को भी खारिज किया, जिनमें कहा गया था कि नियुक्तियों से पहले आवेदन मांगे गए थे। उन्होंने कहा कि यदि वाकई आवेदन मांगे गए होते, तो महिलाएं जरूर आगे आतीं। आज महिलाएं हर क्षेत्र में नेतृत्व कर रही हैं, फिर संगठन में उन्हें पीछे क्यों रखा जा रहा है। कहा कि एक तरफ हम ग्रास रूट कार्यकर्ताओं को आगे लाने की बात करते हैं, लेकिन नई नियुक्तियों में यह कहीं नजर नहीं आता।

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