गंभीर रूप से घायल महिला की मौके पर ही मौत हो गई
शिमला,ब्यूरो रिपोर्ट
रोहड़ू उपमंडल के कुलगांव में देर रात एक धार्मिक अनुष्ठान के दौरान हुई हवाई फायरिंग ने खुशी के माहौल को मातम में बदल दिया। देवता के आयोजन में सैकड़ों लोग पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन पर नाच-गा रहे थे, तभी अचानक हुई फायरिंग के दौरान एक महिला को गोली लग गई, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।मृतका की पहचान रितिका (उर्फ गुड़िया), पत्नी सतीश, निवासी गांव बकोरा डाकघर आंध्रा, तहसील चिड़गांव, जिला शिमला के रूप में हुई है। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
पुलिस ने दो आरोपियों रजत सोहटा और अमित अक्का को गिरफ्तार कर लिया है।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, देवता के अनुष्ठान के दौरान कुछ लोगों द्वारा हर्ष फायरिंग की जा रही थी। इसी बीच अचानक चली एक गोली भीड़ में जा लगी और रितिका को गंभीर रूप से घायल कर दिया। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत उन्हें अस्पताल ले जाने का प्रयास किया, लेकिन तब तक उनकी मृत्यु हो चुकी थी। घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाया जा रहा है कि फायरिंग किसने की और हथियार वैध था या नहीं।इस दर्दनाक हादसे ने धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे आयोजनों में हथियारों के इस्तेमाल पर सख्त प्रतिबंध लगाया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। प्रशासन की ओर से लोगों से अपील की गई है कि किसी भी तरह की हर्ष फायरिंग से बचें, क्योंकि यह न केवल अवैध है, बल्कि जानलेवा भी साबित हो सकती है।कुलगांव में हुई फायरिंग की घटना के बाद मृत महिला का शव जब रोहड़ू अस्पताल पहुंचा तो वहां माहौल तनावपूर्ण हो गया।
महिला की मौत से आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया और स्थानीय विधायक व एसडीएम के खिलाफ नारेबाजी की।जानकारी के अनुसार, गोली लगने से घायल महिला को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल लाया गया था, इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज शिमला भेजा जाना था। सुबह करीब 10 बजे पुलिस प्रशासन द्वारा शव को शिमला भेजने के लिए वाहन मंगवाया गया, लेकिन मौके पर पहुंचे परिजनों का गुस्सा उस समय भड़क गया जब उन्होंने देखा कि जिस वाहन में शव ले जाने की व्यवस्था की गई थी, उसमें पहले से रेत भरी हुई थी। इसे लेकर परिजनों ने कड़ा विरोध जताया और इसे मृतका के प्रति असंवेदनशीलता करार दिया।परिजनों ने आरोप लगाया कि जिस समय कुलगांव में फायरिंग की घटना हुई और हथियार लहराए गए, उस दौरान पुलिस और प्रशासन की भूमिका संदिग्ध रही। उन्होंने सवाल उठाए कि आखिर ऐसी घटना को रोकने के लिए समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई। स्थिति को संभालने के लिए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को मौके पर हस्तक्षेप करना पड़ा। काफी देर तक चले विरोध-प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने शव को एंबुलेंस के माध्यम से शिमला भेजने की व्यवस्था की, तब जाकर मामला शांत हुआ।इस घटना ने एक बार फिर कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है, ताकि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।

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