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जेबीटी शिक्षक पदोन्नति पर उठे सवाल, नियुक्ति प्रक्रिया की होगी जांच

                                        प्रमोशन विवाद गहराया, आधार और नियमों की जांच के आदेश

शिमला,ब्यूरो रिपोर्ट 

हिमाचल प्रदेश में जेबीटी शिक्षकों की पदोन्नति को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। स्कूल शिक्षा निदेशालय ने 2012 से 2017 के बीच नियुक्त शिक्षकों की वरिष्ठता तय करने से पहले उनके नियुक्ति आधार की दोबारा जांच के आदेश दिए हैं। निदेशालय के इस फैसले से हजारों शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया फिलहाल अधर में लटक गई है।विभाग की ओर से जारी अस्थायी वरिष्ठता सूची पर कई जेबीटी शिक्षकों ने आपत्तियां दर्ज कराई हैं।

 उनका कहना है कि सूची सामान्य जेबीटी मेरिट के आधार पर तैयार की गई है, जबकि उनकी नियुक्ति टेट मेरिट के आधार पर हुई थी। ऐसे में पदोन्नति के लिए उनकी  वरिष्ठता भी उसी आधार पर तय की जानी चाहिए।शिक्षा निदेशालय ने सभी जिला उपनिदेशकों (प्रारंभिक शिक्षा) को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने जिलों में 2012 से 2017 के बीच नियुक्त जेबीटी शिक्षकों के नियुक्ति आधार (टेट मेरिट या सामान्य बैच/मेरिट) की जांच कर प्रमाणित जानकारी तत्काल उपलब्ध कराएं। यह रिपोर्ट विभागीय ईमेल के माध्यम से भेजने को कहा गया है। आदेशों में स्पष्ट किया गया है कि दी गई जानकारी पूरी तरह सत्यापित और प्रमाणित होनी चाहिए, क्योंकि इसी के आधार पर पदोन्नति सूची अंतिम रूप लेगी।इस विवाद के चलते जेबीटी से टीजीटी पदोन्नति प्रक्रिया पर फिलहाल ब्रेक लग गया है। इस संबंध में निदेशालय  का कहना है कि जब तक नियुक्ति आधार स्पष्ट नहीं हो जाता, तब तक किसी भी तरह की पदोन्नति करना उचित  नहीं होगा।मामले को लेकर शिक्षकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। 

टेट मेरिट से नियुक्त शिक्षक खुद को वंचित महसूस कर रहे हैं, जबकि सामान्य मेरिट वाले शिक्षक मौजूदा सूची को सही ठहरा रहे    हैं। ऐसे में यह मामला अब गरमा गया है।प्रदेश में बढ़ती गर्मी के बीच अब स्कूलों की समयसारिणी बदलने की मांग जोर पकड़ने लगी है। हिमाचल प्रदेश स्कूल लेक्चरर संघ ने सरकार से अपील की है कि छात्रों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए स्कूल टाइमिंग में बदलाव किया जाए। संघ के प्रांतीय मुख्य मीडिया सचिव राजन शर्मा ने बताया कि वर्तमान में स्कूल सुबह 9 बजे शुरू होते हैं, लेकिन इस समय तक तेज धूप और गर्मी का असर शुरू हो जाता है। दिनभर तापमान बढ़ता रहता है, जिससे छात्रों और शिक्षकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने विशेष रूप से ऊना, कांगड़ा, बद्दी, नालागढ़ सहित निचले क्षेत्रों का जिक्र करते हुए कहा कि यहां गर्मी का प्रकोप ज्यादा है, इसलिए इन क्षेत्रों में बदलाव बेहद जरूरी हो गया है। संघ ने सुझाव दिया है कि स्कूलों का समय सुबह जल्दी किया जाए, ताकि भीषण गर्मी से राहत मिल सके। सरकार और प्रशासन से आग्रह किया है कि इस मुद्दे पर शीघ्र निर्णय लेते हुए आवश्यक कदम उठाए जाएं, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो और उनका स्वास्थ्य भी सुरक्षित रह सके। 

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