ग्राम पंचायत थिल में मतगणना प्रक्रिया पर उठे सवाल, चुनाव आयोग से निष्पक्ष जांच की मांग
काँगड़ा,रिपोर्ट नवीन शर्मा
ज्वालामुखी विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत थिल में पंचायत चुनाव के दौरान कथित धांधली के आरोपों को लेकर मामला गरमा गया है। वीरवार को पंचायत के सैकड़ों ग्रामीणों ने एसडीएम कार्यालय ज्वालामुखी के बाहर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।
ग्रामीणों ने हिमाचल प्रदेश चुनाव आयोग को भी शिकायत पत्र भेजा है, जिसमें मतगणना प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं।शिकायत पत्र के अनुसार 26 मई 2026 को मतदान समाप्त होने के बाद पंचायत घर में मतगणना होनी थी। पंचायत में कुल पांच वार्ड हैं और मतदान केंद्र से पंचायत घर की दूरी लगभग 80 मीटर बताई गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि चार वार्डों की मतपेटियां शाम करीब चार बजे तक पंचायत घर पहुंच गई थीं, लेकिन वार्ड नंबर-1 की मतपेटी करीब ढाई घंटे की देरी से पहुंची, जिससे लोगों में संदेह पैदा हो गया।ग्रामीणों का कहना है कि जब इस देरी को लेकर एआरओ से सवाल किया गया तो उन्होंने स्टाफ के नया होने और सीलिंग प्रक्रिया की जानकारी नहीं होने की बात कही। आरोप है कि लोगों के आक्रोश के बाद करीब 10 से 15 मिनट के भीतर उक्त मतपेटी बिना किसी सुरक्षा कवर और बिना पुलिस कर्मियों के पंचायत घर पहुंचाई गई। शिकायतकर्ताओं ने दावा किया है कि इस पूरी घटना की वीडियो रिकॉर्डिंग भी मौजूद है।
मामले में निष्पक्षता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि वार्ड नंबर-4 में प्रधान पद की प्रत्याशी मनभरी के सगे भाई की ड्यूटी लगाई गई थी, जिससे चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इसके अलावा एक अन्य पंचायत के एआरओ द्वारा मतगणना स्थल के भीतर जाकर स्थानीय एआरओ से बातचीत करने पर भी ग्रामीणों ने आपत्ति जताई है।ग्रामीणों ने मतदान और मतगणना के आंकड़ों में अंतर होने का भी आरोप लगाया है। शिकायत के मुताबिक मतदान समाप्ति के समय कुल 921 वोट डाले जाने की जानकारी दी गई थी, जबकि मतगणना पूरी होने के बाद यह संख्या 928 बताई गई। इस अंतर को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं।प्रधान पद के रिजेक्ट वोटों को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि जिन वोटों को रिजेक्ट घोषित किया गया, उन्हें भी एक प्रत्याशी के खाते में जोड़ दिया गया। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने बार-बार आपत्ति दर्ज करवाई, लेकिन एआरओ द्वारा कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं की गई।ग्रामीणों ने चुनाव आयोग से मतगणना की वीडियो रिकॉर्डिंग की जांच करवाने, रिजेक्ट वोटों की दोबारा गिनती कराने और संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने की मांग की है। पंचायत क्षेत्र में इस मामले को लेकर भारी रोष का माहौल बना हुआ है।

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