प्रदेश में ज्यादातर छात्र स्कूल छोड़ने के बजाय उच्च शिक्षा की ओर बढ़ रहे हैं, शिक्षा व्यवस्था बनी मिसाल
शिमला,ब्यूरो रिपोर्ट
हिमाचल प्रदेश में बच्चे स्कूल छोड़ने के बजाय लगातार आगे की पढ़ाई जारी रख रहे हैं। माध्यमिक स्तर तक पहुंचने वालों की संख्या राष्ट्रीय औसत से बेहतर बनी हुई है। नीति आयोग की मई 2026 में जारी रिपोर्ट स्कूल एजुकेशन सिस्टम इन इंडिया में इसका खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल में प्राथमिक से लेकर माध्यमिक स्तर तक विद्यार्थियों के स्कूल से जुड़े रहने की दर देश के कई बड़े राज्यों से बेहतर है।
आयोग ने हिमाचल को उन राज्यों में शामिल किया है, जहां शिक्षा तक पहुंच और विद्यार्थियों की निरंतरता मजबूत बनी हुई है। हिमाचल में प्राथमिक से अपर प्राथमिक स्तर तक विद्यार्थियों का ट्रांजिशन रेट 99.5 प्रतिशत दर्ज किया गया है। अपर प्राथमिक से सेकेंडरी स्तर तक यह दर 98 प्रतिशत रही। प्रदेश में अधिकांश विद्यार्थी शुरुआती कक्षाओं के बाद स्कूल छोड़ने के बजाय आगे की पढ़ाई जारी रख रहे हैं।
देश के कई राज्यों में जहां आठवीं या दसवीं तक पहुंचते-पहुंचते बड़ी संख्या में विद्यार्थी शिक्षा प्रणाली से बाहर हो जाते हैं, वहां हिमाचल की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है। दुर्गम और ग्रामीण क्षेत्रों तक स्कूल नेटवर्क पहुंचाना हिमाचल की बड़ी उपलब्धियों में माना जाता है। रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश का सेकेंडरी स्तर पर सकल नामांकन अनुपात 102.6 प्रतिशत दर्ज किया गया है। इस श्रेणी में हिमाचल, चंडीगढ़, गोवा, दिल्ली और कर्नाटक जैसे राज्यों के साथ शीर्ष प्रदर्शन करने वालों में शामिल है। नामांकन अनुपात का 100 प्रतिशत से अधिक होना इस बात का संकेत माना जाता है कि निर्धारित आयु वर्ग से अधिक आयु के विद्यार्थी भी स्कूल शिक्षा से जुड़े हुए हैं। रिपोर्ट का चिंताजनक पहलू सिंगल टीचर स्कूलों की बड़ी संख्या है। प्रदेश के 2,964 सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जहां एक ही शिक्षक पहली से पांचवीं या उससे अधिक कक्षाओं तक के विद्यार्थियों को पढ़ा रहा है।
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